एटा जनपद -अनोखी कहानी

                        

एटा  जनपद  -अनोखी कहानी

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एटा जनपद - अनोखी कहानी



    

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अध्याय

एटा जनपद की कहानी

एटा जनपद में  विधायकी पहली बार

एटाजनपद में संसदी पहली बार

एटा जनपद के विधान सभा क्षेत्र विवरण

एटा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक

एटा  के बाज़ार

एटा जनपद के राजनीतिक लोग

एटाके पुरात्विक स्थल

एटा के विधानसभा के चुनाव परिणाम

एटा के नगर समूह का समूह

रिजोर का इतिहास

 जलेसर तहसील के जादौन राजपूतों के प्रमुख गाँव

 

 

 

 

 

 

एटा का इतिहास

एटा जनपद की कहानी

प्रशासनिक  इकाई के रूप में परगना 19वी शताब्दी  को औधौंगिक क्रांति के पूर्व किसी भी शासन को आय का प्रमुख आधार उसका भू-राजस्व   ही होता था अतः स्वाभाविक था ,कि शासन इस भूराजस्व को की उगा हीं के लिए एक ऐसी पद्धति का विकास करते ,जिससे उनके राजस्व प्राप्ति के प्रयास  सुसंगत व सुव्यवस्थित हो प्राचीन भारतीय नरेशों द्वारा इस भूराजस्व को पाने के लिए जिस भुक्ति या विषय नामक की इकाई की स्थापना की थी कमोवेस उसी का मध्यकालीन स्वरुप परगना हैं

सौभाग्य से इतिहास में परगना शब्द का पहला प्रयोग अपने जनपद एटा के मारहरा परगना को अलाउद्दीन खिलजी काल का मिलता हैं अनुश्रुति यही कही जाती हैं,की मारहरा के तत्कालीन नरेश राजा स्वरुप सिंह द्वारा स्थापित स्वरूपगंज सहित उनके राज्य राज्य पर अधिकार कर सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने इसे अलग प्रशासनिक क्षेत्र बनाते हुए इसे परगना नाम दिया

परगना  नामक प्रशासनिक इकाई के प्रयोग के अधिक के सर्वाधिक असंदिग्ध अभिलेख बादशाह अकबर के समय लिखी गयी “आईने -अकबरी” मिलते हैं इसके अनुसार जनपदीय क्षेत्र का जलेसर परगना आगरा सूबा के अंतर्गत सरकार  आगरा का भाग था |यहाँ एक ईट का किला भी था

 इस काल में यहाँ कृषि योग्य क्षेत्र ९०४७३३ बीघा था जो अकबर को ६८३५४० बीघा का राजस्व देता था जलेसर से ४००घुड़सवार तथा 5000 पैदल सैनिक भी दिएजातेथे जबकि जनपद का पटियाली ,सकीट,सहवर,सिकंदरपुर ,अतरंजी परगना सरकार कन्नौज भाग थाइसमें पटियाली १५८६३४ बीघा का १५८६३४ दम देने वाला महाल था जो 100 घुड़सवार तथा २००० पैदल सैनिक की आपूर्ति  करता था

 वही सकीट  १३२८५५ बीघा ३२३०७५२ दम का परगना था जो १००० घुड़सवार तथा ३००० पैदल सैनिक सैनिकों की  आपूर्ति करता था इस कल में परगना सहावर  20 घुड़सवार व ५०० पैदल सैनिक देता था  जबकि सिकंदरपुर ,अतरंजी 5 सशस्त्र  तथा 150 पैदल सैनिक देता था  ये दोनों परगने उस काल में ११४६५८ बीघा के अकबर को ५२१८६७ दाम के परगने थे दोनों को बाद में सहावर -करसाना नाम  से एक कर कर दिया  

जनपद का सौहार परगना इस काल में बरना का भाग था  मारहरा ,बिलराम ,सोरों ,पचलाना व सिढ़पुरा  परगने सरकार  कोइल के अन्तर्गत  थे तो जिले का २५३१२० बीघा कृषि भूमि का फैजपुर बदरिया  परगना महाल सहसवान के अंतगर्त मारहरा दस्तूर के अंतर्गत बदायू  सरकार व दिल्ली  सूबे के अंग थे 

 

बिलराम परगने पर इस काल में अफगानों व चौहानों का अधिपत्य  था यहाँ से अकबर को 50 घुड़सवार तथा १००० पैदल सैनिक दिए जाते थे  १११८७८ बीघा का यह परगना २१३१७६५ दम राजस्व देता था  पचलाना ३९१२८ बीघा का ६२४८२५ दम राजस्व  का परगना था  यहाँ से अकबर को 200 घुड़सवार तथा 5000 पैदल सैनिको की  आपूर्ति होती थी. सोरों इस काल में राजपूत व  सैय्यदो  के अधिकार था  यहाँ से अकबर को 20 घोड़े ४०० पैदल सैनिक  दिए जाते थे इसका कृषि भूमि क्षेत्र ४०६५६ बीघा था इस काल में सिढ़पुरा ७०५६७ बीघा कृषि भूमि का ९८९४५८ का दाम शर्ति राजपूत  के अधिकार का परगना  था जिले का सर्वाधिक बड़ा महल मारहरा था राजपूतों के अधिकार का २०५५३७ बीघा कृषिभूमि क्षेत्र यह परगना ३६७९५८२दम राजस्व देने के साथ 200 घोड़े व २००० पैदल सनिक भेजता हैं

इस सूची में आज़मनगर के साथ शमशाबाद परगना का  नाम हैं १९०९ के जिला गजेटियर के अनुसार इसी का विभाजन कर १८ वी शताब्दी में आज़मनगर नाम से एक नए परगने का सर्जन किया गया हैं, इस सूची में उलाई  व निधिपुर परगनों के नाम नहीं हैं प्रतीत होता हैं ,की या इन परगनों का सर्जन ही बाद में ही हुआ हो.अथ वा इनके तत्कालीन नाम भिन्न हो|

 

एटा जिला की निर्माण की कहानी १७५७ ई में प्लासी युद्ध के बाद बंगाल का राज्य हथिया लेने के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी के निदेशकों ने अपनी हड़प नीति औरबढावा देने के लिय कूटनीतिक   प्रत्यन्त करने के बाद आरम्भ कर दिऐ इन प्रयन्तो के तहत सबसे पहले उन्होंने अवध को  दिल्ली की बादशाहत से पृथक कर उसे स्वतंत्र मान्यता दी फिर उसे राज्य की वृद्धि का लालच देकर रुहेलों की शक्ति कम करने के काम करने लगा दिया इस भिड़त में अवध ने मराठों व अंग्रेजो का भी सहयोग लियातथा फर्रुखाबाद के  तत्कालीन बंगश नवाब को दबाकर उससे युद्ध  व्यय के नाम पर उसके करीब ३१ परगने छीनकर अपने राज्य में मिला लिए साथ ही नवाब फर्रुखाबाद को मराठा सेनाओ  को अवध द्वारा दी जाने वाली राशि भी देने में सहमत होना पड़ा

इस व्ययस्था का यह परिणाम हुआ,कि मराठा जिले के मारहरा ,जलेसर परगने से लेकर इस क्षेत्र के समस्त भू-भाग के स्वामी बन गए. इधर इस व्ययस्था से अपने लिए लाभ ना होता देख अंगरेजों अपने सैन्य-व्यय की प्रतिपूर्ति के लिए अवध द्वारा नवाब फर्रुखाबाद से छीने भूभाग लेने बाद उन्होंने फर्रुखाबाद के तत्कालीन बंगश नवाब इमदाद हुसैन पर एक निश्चित पेंशन राशि  के एवज में राज्य को ईस्ट इंडिया कंपनी को सौपने का दवाब डाला  नाबालिग नवाब इमदाद हुसैन द्वारा अंग्रेजों के प्रस्ताव को अस्वीकर करने के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी के तत्कालीन गवर्नर जनरल लार्ड बेलेजली अपने भाई हेनरी बेलेजेली  को इस काम में लगाया

इस कूटनीति ,धोखाधड़ी का सहारा लेकर  पहले नवाब के अधिकारियो को दवाब में लिया. फिर ०४/०६/१८०२ में बरेली  में नवाब इमदाद हुसैन  को अपने तथा अपने उत्तराधिकारियो केलिए१००००८ वार्षिक पंशन की स्वीकार कर अपने राज्य को  कंपनी को सौपने को बाध्य कर दिया नवाब का राज्य प्राप्त हो जाने के बाद इस क्षेत्र में भोगोलिक रूप से अंग्रेजो को कोई खास लाभ नहीं हुआ

कारण इटावा से लेकर कोइल (  अलीगढ )तक के परगने व्यवहारिक रूप से बंगश या अवध के नवाब के अधीन नहीं,मराठाओ के अधिकार में थे तथा उनके प्रतिनिधि  एटा के अलीगंज तथा वर्तमान कन्नौज जिला मुख्यालय पर रह इन क्षेत्रो की व्यवस्थाये  सम्भालते थे सेनापति पैरा  के अधीन एक आधुनिक  सेना मोजूद थी जिसके व्यय के लिए जलेसर से लेकर सहारनपुर तक परगने के पैरा के अधीन किये गए थे

 इस गतिरौध तूदाने के लिए अंग्रेजी सेना के सेनापति लार्ड लेक ने १८०२ में एक सैन्य अभियान किया.इसका प्रत्यक्ष उद्देश्य तो दिल्ली के बादशाह को पुन : दिल्ली के सिहासन पर बैठाना था छिपा उद्देश्य इस क्षेत्र से मराठा प्रभाव समाप्त करना था इस अभियान में दौलत राव सिंधिया के फ़्रांसिसी सेनापति पैरा  के विस्वासघातके कारण मराठाओ को काफी  क्षति उठानी पड़ी उनके ये समस्त क्षेत्र अंग्रेजो के कब्जेअधिकार में आ गए १८०४ में अंग्रेजो द्वारा इस इस भूभाग पर अधिकार कर लेने के पश्चात यहाँ कि भूराजस्व प्रणाली के बदले बिना किसी डिस्ट्रिक्ट के हवाले कर तथा वहां कलेक्टर ( शुद्ध अर्थ संग्रहक )वसूली करने वाला नियुक्त कर इस क्षेत्र के भूराजस्व की प्राप्ति के प्रयास किये गए  इसके अन्तर्गत सबसे पहले उन्होंने इस समस्त भूभाग को इटावा ,फर्रुखाबाद व इटावा के जिलों में शामिल कर कासगंज के छावनी गाँव में एक सैन्य छावनी छावनी स्थापित की किन्तु इसे १८०४ में वहां के विद्रोही जमींदारों ने जला डाला इसी वर्ष १ नवेम्बर को दुसरे मराठा सेनापति यशवंत राव होल्कर ने इस क्षेत्र को विजित कर  करने हेतु अभियान किया अंग्रेजी फौजों से कई स्थानों पर छिटपुट घटनाये होने के बाद कादरगंज में लार्ड लेक और होल्कर के मध्य१७/11/१८०४ को निर्णायक युद्ध में होल्कर की पराजय हुई उसे यहाँ से हटना पड़ा

इस क्षेत्र पर पूर्ण अधिकार कर लेने बाद १८११ में पटियाली में एक यूरोपियन अधिकारी को पदस्थ भू राजस्व की वसूली के प्रयास किये १८१६ में पटियाली  हेड क़वाटर  को सिढ़पुरा स्थापित किया  कमिश्नर  बोर्ड के सहायक  सेक्रेटरी  कोल्बेर्ट को यहाँ का अधिकारी बनाया  १८१६ में ही बिलराम ,फैजपुर ,बदरिया व सोरों के परगने तथा आधा मारहरा का भाग  इटावा से हस्तारण कस्र्ब अलीगंज में मिला लिया  अलीगंज को तहसील बनाया गया जबकि एटा ,सकीट   और  मारहरा का शेष भाग एटा का ही अंग रहा  १८२४ में इटावा  के कुछा भाग मैनपुरी के कलेक्टर तथा इटावा ,बेला,व सिढ़पुरा के उप्कलेक्टर में विभाजित किये इस व्यवस्था से सिढ़पुरा में प्राय: आधा भाग शामिल था अंग्रेज अधिकारी हर्बट को यहाँ डिपुटी कलेक्टर बनाया गया उन्होंने स्वेट होम से सिढ़पुरा  व सहावर  तथा कलेक्टर  इटावा से एटा व सकीत  प्राप्त हुए हर्बट के उपरांत टर्नर  तथा इसके बाद १८२६ में न्यूहोम आये  कालान्तर में बिलराम,फैजपुर बदरिया,सोरों ,तथा आधा मारहरा मिलकर कासगंज तहसील बनी  तथा इसे वर्तमान बदायू  जिला जिले के पूर्वर्ती सहसवान जिले से जोड़ा गया इस समय हर्बट सिढ़पुरा का अंग्रेज अधिकारी था स्वेटन होम के सिढ़पुरा के डिप्टी कलेक्टर बनने के बाद सिढ़पुरा व सहावर  परगनों के अतिरिक्त इटावा कलेक्टर से एटा -सकीट  व  आधा मारहरा प्राप्त कर इन्हें भी स्वेटन होम को सौप दिया पर इसने सिढ़पुरा की जगह पुन: पटियाली को ही अपना मुख्यालय बनाया

१८२७ में  बिलराम,फैजपुर, बदरिया ,सोंरों व आधा मारहरा परगने के भू-भागों को सहसवान  जिले से हटाकरसिढ़पुरा से सम्बन्ध कर दिया गया  किन्तु  प्रशासनिक मुख्यालय से पटियाली से हटाकर फतेहगढ़  स्थापित करदिया गयाथा १८२८ में इस क्षेत्र के अधिकारीयों को मिले विशेष मजिस्ट्रेटी  अधिकार वापस लेलिए गए  किन्तु १८३७ तह यह क्षेत्र मालगुजारी के लिए पृथक रहा

जबकि पटियाली को फरूखाबाद को आजमनगर तहसील मे मिला दिया सहसवान  से प्राप्त परगने पुनः उसी  को लोटाए गए तथा इटावा से प्राप्त परगने मैनपुरी को सौप दिए गए  पर  यह व्यवस्था थी की कारगर साबित नहीं हुयी २६/०४/१८४५ में पुनः एक नयी व्यवस्था बनाकर बेन्यार्ड को इस क्षेत्र का जॉइंट मजिस्ट्रेट व डिप्टी कलेक्टर बनाया गया  बरना ,आज़म नगर व पाटियाली  को मिलाकर बनायी गयी ,फर्रुखाबाद जिले की आज़मनगर तहसील ,सकीट ,सिढ़पुरा,सहावर-करसाना ,एटा-सकीट  व  सौंहार परगनों को मिला कर  बनायी गयी सकीट  तहसील तथा बिलराम ,सोरों,फैजपुर बदरिया ,उलाई  व आधा मारहरा को मिला कासगंज तहसील को इसके अधीन किया गया १८४७ में  डिप्टी कलेक्टर को स्वाधीन  ना रख इसे सम्बंधित  जिलो के कलेक्टर के अधीन कर दिया गया

 अत :यह व्यवस्था भी कारागर  सिद्ध ना हुई   तो १८५२ में अंत में डिप्टी कलेक्टर व जॉइंट मजिस्ट्रेट  के रूप एफ.ओ.मेयन की नियुक्ति की गयी इसने प्रशासनिक मुख्यालय को पटियाली को हटाकर जी.टी.रोड स्थित एटा ग्राम को बनाया गया अंग्रेजो ने भी १८५४ में एटा को पूर्ण जिला बनाया गया अंग्रेजो ने भी एफ .ओ .मेयन को जिले का पहला कलेक्टर बना दिया १८५६ में मारहरा व पचालाना की अलीगढ से तथा १८७९ में मथुरा से जलेसर परगना हटा ,इस नवसर्जित जिले का भाग बनने के एटा जिला का जो मानचित्र सामने आया,वह  वर्ष २००८ तक यथावत बना रहा तत्कालीन जिले में जलेसर परगना  को पृथक् तहसील के रूप में सम्मिलित कर लिया गया

 जबकि सकीट ,सौंहार ,मारहरापरगने  एटा तहसील का भूभाग बने  वही आज़मनगर ,बरना,पटियाली,व निधिपुर परगनों को मिलकर अलीगंज तहसील बनाया  बिलराम,पचलाना,फैजपुर बदरिया,सोरो,उलाई,सहावर  व सिढ़पुरा ,कासगंज तहसील के भाग रहे हैं

 वर्ष १९८२ में पटियाली को नया तहसील मुख्यालय बनाकर , उसमे  पटियाली ,निधिपुर,सिढ़पुरा के परगने सम्मिलित कर दिए 15/०४/२००८ को तत्कालीन मुख्यमंत्री  सुश्री मायावती  ने कासगंज को जिला बनाने के बाद यह व्यवस्था बदली हैं  अब 6  एटा  जिले के,जबकि 9 परगने कासगंज जिले के भाग हैं 

एटा -कासगंज जिले के परगना तत्कालीन एटा जिले में १५ परगने सम्मिलित किए गए इनमे से मारहरा ,सकीत,सोंहार ,आज़मनगर ,बरना,जलेसर कुल 6 परगना अब एटा जिला के भूभाग  हैं.

 

·       1-सोंहार

एटा  तहसील का यह परगना महज 36 राजस्व गाँव का हैं |

·       इसे उत्तर में सिढ़पुरा,पूर्व में बरना,दक्षिण में मैनपुरी जनपद ,तथा पश्चिम में सकीट परगने का भूभाग हैं|यह काली नदी के तट पर स्थित  हैं  

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

रिजोर का इतिहास


रिजोर  राज्य का नक्शा चित्र -1

 

 

12 राजस्व गाँव

रिजोर ,रामनगर रिजोर ,बक्शीपुर रिजोर ,सिकंदरपुर रिजोर ,मुबारिकपुर रिजोर ,दत्तपुर रिजोर ,उम्मेदपुर रिजोर ,उम्मेरपुर रिजोर ,उम्मेदपुर सेना ,उम्मेदपुर सेना,उम्मेदपुर भुडिया ,उम्मेदपुर,उमरायपुर रिजोर

रिजोर राज्य का इतिहास

उम्मेदपुर- राजा उम्मेद सिंह चौहान   का गाँव

उम्मेरपुर रिजोर- उम्मेर सिंह चौहान ,जो मुस्लमान बन गए थे |

दत्तपुर  -दत्तसिंह चौहान का गाँव

मुबारिकपुर रिजोर-मुबारिक खान का गाँव

सिकन्दरपुर रिजोर- सिकन्दर लोदी  का राज्याभिषेक

बक्शीपुरमीर बख्शी  का गाँव

रामनगर रिजोर- रामसिंह चौहान की बसी राजधानी

रिजोर – राजा रिजोरा सिंह चौहान की नाबालिग ,राजा डम्बर सिंह भतीजे  ,रिजोर के राजा खुशाल सिंह थे इनके चाचा राजा डम्बर सिंह एटा के राजा थे  दोनों १८५७  ई  में अंग्रेजो से बगावत करके अपना शासन गवां दिया बाद में खुशाल सिंह ने अपने परिवार से अलग होकर अपने नाम से खुशालगढ़ में किला बनाया |गुजारे के तौर पर 12 गाँव दिए १८५७ में विघटन व अंग्रेजो ने राज्य हथिया लिए .यह स्वतंत्रता आन्दोलन में सुभाषचंद्र बोसे ,महात्मा गाँधी १९४२ की सदी में भाषण देने आये

रुश्तमगढ़रुस्तमगढ़  का मकबरा या कब्र

खुशालगढ़ – राजा खुशाल  सिंह चौहान की नयी बनाई राजधानी

रामगढ –राजा रामसिंह का किला

बहलोलपुर-बहलोल लोदी का यहाँ पर निधन हुआ

चपरई -राजा धोकल सिंह चौहान की गढ़ी (हाथी-घोडा  का अस्तबल )

कुल्ला हबीबपुर -तत्कालीन दिल्ली सल्तनत सुलतान बहलोल लोदी का सरदार हबीब खान ने यहाँ पर कुल्ला कर दिया था जहाँ पर एक मकबरा हैं,जो हबीब खान के नाम से जाना जाता हैं  सकित से दक्षिण  2 किमी पर हैं यहाँ पर गाड़ी से जाया जाता हैं |यहाँ पर हबीब खान के वंशज  रहते हैं यहाँ पर मेला लगता हैं |इस जगह का हबीब खान नाम पर रखा गया हैं यहाँ पर खुद मैंने उर्स (मेला) पर दुकान लगवाई हैं

सौहार परगना की कहानी-जनपद एटा

इटावा से लौट रहे तत्कालीन सुल्तान बहलोल लोदी सल्तनत विवरण के अनुसार लू लगने के कारण ,जबकि सकीट  चौहानों के अनुसार मलगाँव में  (अब मलावन),चौहानों के युद्ध में घायल होने के कारण सोंहार में रुका तथा यही इसकी मौत हो गयी उसका बेटा सिकन्दर लोदी सुल्तान बनने के बाद   सौंहार के समीप उसका मकबरा बनबाया किन्तु बरना परगना में स्तिथ कठिगरा गाँव (शाही शिकारगाह कुशके -ए-फिरोजी था )से अपना राज्याभिषेक कराकर आगरा सल्तनत की गद्दी संभाली .वैसे सौहार अति प्राचीन गाँव हैं कवि भीमदेव  लिखित “चालुक्य वंशज प्रदीप”के अनुसार सौंहार की स्थापना सोरों /अतरंजी खेड़ा के चालुक्य शासक सेनापति के द्वारा की गयी है

सौंहार  परगने में 36 गाँव सम्मिलत है

अकबरपुर -215045

2

अयार-

अम्बरपुर -

4

कंगरोली-२१५०४४ 

5

कुंवरपुर नगरिया-२१५०२८

6

गढ़िया सीलम -२१५०३४

7

जैतपुर -215029

8

जमालपुर -214880

9

जलालपुर संथाल-215026

10

जलालपुर पलरा -214871

11

ज्यौरी-214871

12

दतौली-

13

दुनइया-

14

दासपुर -

15

देवपुरा-215033

16

नूरपुर-215030

१७

नागमई-

18

नगला हुर्रिया-214875

१९

नगला रंजन-215042

२०

नगरिया-215104

21

नवादा -215032

२२

नरौरी-

२३

पंचलहरा 214873

२४

फतेहपुरा- 215036

25

बिरसिंगपुर-215022

२६

मैनाठेर -214876

२७

मलावन-215039

२८

मुहम्मदपुर-215041

२9

पुरन खेडा -

30

राजपुर-214878

३१

रामनगर-215035

३२

रसूलपुर -215034

३३

लखपुर -215025

३४

सोसा -214874

३५

सौंहार -214637

३६

हरचन्दपुर -214874

३७

महुआ खेडा -२१५०४३

३८

 

इनमे मैनाठैर ,सोंसा,व सौंहार एतिहासिक महत्व के गाँव हैं

गाँव अलीगंज-एटा

यह प्राचीन गाँव अलीगंज ,फर्रुखाबाद के बंग़श नवाब याकुतखान ने अपने नाम पर यह नगर बसाया था सन १७४७ में यहाँ मिटटी का दुर्ग(किला) बनाया और अपने नाम शहर का नाम रखा था यहाँ पर  मिटटी का बहुत बड़ा मिटटी का किला हैं अब यह नगर पालिका हैं  बंग़श नवाब याकुतखान ने अलीगंज नाम रखा था याकुत् गंज  पटियाली के गंगा किनारे एक क़स्बा हैं .पहले फर्रुखाबाद का एक परगना १७४७ से पहले था .१८५७ ई.में  जिला एटा  बनने पर एटा  में सम्मलित किया गया था

एटा के नगर समूह का समूह

१८७५ में ,पटियाली जनपद में कस्बे अलीगंज ,एटा ,कासगंज ,मारहरा ,और सोरों (प्रोविजन परिषद् )

(सन १८७३ के 14वे खंड शहरी विकास अधिनियम के तहत )

और स्थित अमापुर ,बिलराम ,धुमरी ,गंजड न्ड्वारा ,कादिरगंज ,मोहनपुर ,निधौलीकला ,पटियाली,राजाका रामपुर,सहावर,सकीट ,सरायअगहत ,गन्थरी और सिढ़पुरा ,एक पुलिस बल से सम्बन्ध थे (पुलिस कानून ,कानून १८५६ की धारा 10 के तहत )

अलीगंज १८९० में राज्य का 20वा कस्वा था सन १९०४ में (कस्वा )परिषदीय नगरीय अविभाजित मारहराथा और १८५६ कानून की धारा 10 केतहत सराय अगहट से  वापस मारहरा बना दिया और आदेश के अनुसार ०१/०४/१९०९ में मारहरा  नगर पालिका परिषद् बना

 

एटा जनपद की नगर निकाय ढांचा

ये नगर पालिका व नगर पंचायतका समूह  12 +7 हैं |

नगर पालिका

1-नगर पंचायत

1--अमांपुर

2-अवागढ़

-भरगैन

४-बिलराम

5--मोहनपुर

6-निधौली कलां

7-- सहावर

8- सकीट

9--मिरहची*

10- राजा का रामपुर

11-जैथरा

12- पटियाली

13-सिढ़पुरा

1-नगर पालिका परिषद् -अलीगंज

नगर पालिका परिषद्  अलीगंज-२७/०८/१९७१

अलीगंज गाँव  सन १९२९क़स्बा  में बना |

जनसँख्या -१०२११-१९७१

जनसँख्या घनत्व-1.६३वर्ग / किमी

11 वार्ड  -अलीगंज

(१९७१ के जनसंख्या अनुसार)

2- नगर पालिका परिषद् -एटा

जनसंख्या-

जनसंख्या घनत्व –5.१८ वर्ग /किमी

क़स्बा –

३-नगर पालिका परिषद् -एटा

वार्ड –

(१९७१ के जनसंख्या अनुसार)

-नगर पालिका परिषद् -जलेसर

------------------------------------------------

स्थपाना -०७/१९७५

जनसंख्या-१८०७५

जनसंख्या घनत्व –2.३३ वर्ग /किमी

(१९७१ के जनसंख्या अनुसार)

4-नगर पालिका परिषद् -कासगंज

स्थपाना -१८/०६/१९७०

जनसंख्या-४६४६२

जनसंख्या घनत्व –३.८८ वर्ग /किमी

(१९७१ के जनसंख्या अनुसार)

5-नगर पालिका परिषद् – सोरों

स्थपाना -/ /१८६८

जनसंख्या-१७१५३

जनसंख्या घनत्व –0.68वर्ग /किमी

(१९७१ के जनसंख्या अनुसार)

6-नगर पालिका परिषद् -मारहरा

स्थपाना -//१९५६

जनसंख्या-

जनसंख्या घनत्व –वर्ग/ किमी

(१९७१ के जनसंख्या अनुसार)

7-नगर पालिका परिषद्-गंज

स्थापना -/ / 1950

जनसंख्या-१७२७५

जनसंख्या घनत्व –2.५९वर्ग/ किमी

1-नगर पंचायत-अमांपुर

स्थापना -/ / 1959

जनसंख्या

जनसंख्या घनत्व -३.८७४हे

क्षेत्रफल-८०९हे में क़स्बा हैं |

2 -नगर पंचायत-अवागढ़

स्थापना-/ / १९१४

जनसंख्या-५००००

क्षेत्रफल-८०९वर्ग/किमी

नगर पंचायत अध्यक्ष -राजा सुर्यपाल सिंह

३-नगर पंचायत -भरगैन

स्थापना-25/09/१९७१

क्षेत्रफल-७६.०८ हेक्टेयर

जनसंख्या-८८१०

४-नगर पंचायत -बिलराम

स्थापना-25/09/१९७१

क्षेत्रफल-७६.०८ हेक्टेयर

जनसंख्या-८८१०

5 -नगर पंचायत -मोहनपुर

स्थापना-/ / १९१४

क्षेत्रफल-25.८९ हेक्टेयर

जनसंख्या-३६४१

6 -नगर पंचायतनिधौली कलां

स्थापना-१९१४

क्षेत्रफल-10.९२ हेक्टेयर

जनसंख्या-५०००

जनसंख्या-८८१०

7 -नगर पंचायत-सहावर

स्थापना-/ / १९६२

जनसंख्या घनत्व -६८१ हेक्टेयर

जनसंख्या-१०३४८

8 -नगर पंचायत-सकीट

स्थापना-/ / 1970

जनसंख्या घनत्व -30.25हेक्टेयर(क्षेत्रफल)-

जनसंख्या-८८१०

9 -नगर पंचायत -मिरहची*

स्थापना-/12/२०१९

क्षेत्रफल-

जनसंख्या-

10- -नगर पंचायत-राजा का रामपुर

स्थापना-/  / १९५३

क्षेत्रफल-३.५६ हेक्टेयर

जनसंख्या-६१००

11-   नगर पंचायत-जैथरा

स्थापना-/  /

क्षेत्रफल- हेक्टेयर

जनसंख्या-

12- -नगर पंचायत-सिढ़पुरा

स्थापना-/  /

क्षेत्रफल- हेक्टेयर

जनसंख्या-

1३- -नगर पंचायत-पटियाली

स्थापना-/  /

क्षेत्रफल- हेक्टेयर

जनसंख्या-

 

 

एटा जनपद की लोकसभा सीटो का इतिहास

१९५७ में नाव्स्रजित एटा लोकसभा क्षेत्र बना

72

जलेसर

 

 

70

0

0

70

70

70

70

70

70

70

70

66

0

0

0

 

73

एटा

 

 

71

71

71

71

71

71

71

71

71

71

71

67

22

22

22

 

90

कासगंज

 

 

0

70

70

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

0

 

 

 

 

 

 

 

     एटा जनपद का पुराना  अभिलेख

( ये अभिलेख १९७१ के अनुसार )

एटा  जनपद का विवरण राजस्व

1-एटा  तहसील

2-कासगंज तहसील

३-जलेसर तहसील

४-अलीगंज तहसील

जलेसर तहसील- -

दिसम्बर .१९५८ के अनुसार 60,292 एकड़ (क्षेत्रफल),८७ गाँव

वर्ष१९६३  के अनुसार १८७५९५  एकड़ (क्षेत्रफल),, ३८८ गाँव

अलीगंज तहसील

नबंबर ,१९६५ के अनुसार ,८१४४७ एकड़ (क्षेत्रफल), १३७ गाँव

नबंबर ,१९६६ के अनुसार ,४९६७१एकड़ (क्षेत्रफल), ८५  गाँव

कासगंज तहसील-

जून ,१९६७ के अनुसार ७८७४४ एकड़ (क्षेत्रफल),82 गाँव

एटा जनपद की सबसे बड़ी तहसील थी |

एटा तहसील -योजना प्रारम्भ मार्च ,१९६७ के अनुसार ,१५० ,६४९ एकड़  (क्षेत्रफल),३५१ गाँव

३९७० -गाँव

(  सन १९७५के  जनपद अभिलेख अनुसार )

राजस्व

उ.प्र.भूदान योजना -१२१४ हेक्टेयर भूमि ,एटा के व्यक्तियों ने दान वो भी रेल लाइन  बिछाने के लिए

१९७५-७६ के अभिलेख अनुसार

१९७५-७६ के अभिलेख अनुसार

मजदूरों का प्रकार

कुल क्षेत्रफल

भूमिधर

१५१२५१

शिरदार

२२०.०१८

आसामीस

१४५३

 

 

पुलिस सर्किल -पुलिस स्टेशन

पुलिस सर्किल

पुलिस स्टेशन

एटा शहर

कोतवाली एटा ,सिढ़पुरा ,बागवाला ,सकीट

जलेसर सर्किल

जलेसर ,निधौली कलां ,मारहरा ,अवागढ़

अलीगंज सर्किल

अलीगंज ,पटियाली ,जैथरा ,सिकंदरपुर वैश्य ,GANJDUNDWARA

कासगंज सर्किल

कासगंज ,सोरों ,अमांपुर ,सहावर

 

 

 

करदाता  -१९७५-७६

विवरण ( मूल्य  )

कर (देय)

100 रु

22

101 रु -5000रु

70

५००१-१०००० रु

७२

१०००१ रु -२०००० रु

82

२०००१ रु -५००००० रु -

100

५००००१ रु -ऊपर

NIL

( सन १९७५ के अभिलेख अनुसार  )

पुलिस चौकिया

1-पटियाली गेट ,गोदाम रेलवे कॉलोनी ,जलालपुर ,कुतुबपुर ,मजरा ओनघाट

2-जलेसर ,मारहरा गेट ,शकरौली ,मिरहची

३-अलीगंज,सराय अगहट ,राजाकारामपुर ,धुमरी ,कादिरगंज ,सोनगढ़ी , गंजडुण्डवारा

४-बिलराम,इनौटी ,सोरों गेट ,नदरई गेट ,बिलराम गेट ,सोरों ,मोहनपुर(३९७० गाँव -जनपद अभिलेख के अनुसार)

एटा -तहसील – एटा जनपद फसली वर्ष 1425

·       गढ़ वाले की गाँवो की सूची

·       किशनगढ़ का किला

·       खुशालगढ़ का किला

·       रुस्तमगढ़ का किला

·       बहादुरगढ़ का किला

·       अवागढ़ का किला

गाँव अलीगंज-एटा

यह प्राचीन गाँव अलीगंज ,फर्रुखाबाद के बंग़श नवाब याकुतखान ने अपने नाम पर यह नगर बसाया था सन १७४७ में यहाँ मिटटी का दुर्ग(किला) बनाया और अपने नाम शहर का नाम रखा था .यहाँ पर  मिटटी का बहुत बड़ा मिटटी का किला हैं अब यह नगर पालिका हैं . बंग़श नवाब याकुतखान ने अलीगंज नाम रखा था याकुत् गंज  पटियाली के गंगा किनारे एक क़स्बा हैं पहले फर्रुखाबाद का एक परगना १७४७ से पहले था १८५७ ई में  जिला एटा  बनने पर एटा  में सम्मलित किया गया था.

   एटा  इतिहास

१८७५ में ,पटियाली जनपद में कस्बे अलीगंज ,एटा ,कासगंज ,मारहरा ,और सोरों (प्रोविजन परिषद् )

(सन १८७३ के 14वे खंड शहरी विकास अधिनियम के तहत ) और स्थित अमापुर ,बिलराम ,धुमरी ,गंजड न्ड्वारा ,कादिरगंज ,मोहनपुर ,निधौलीकला ,पटियाली,राजाका रामपुर,सहावर,सकीट ,सरायअगहत ,गन्थरी और सिढ़पुरा ,एक पुलिस बल से सम्बन्ध थे .(पुलिस कानून ,कानून १८५६ की धारा 10 के तहत )

अलीगंज १८९० में राज्य का 20वा कस्वा था सन १९०४ में (कस्वा )परिषदीय नगरीय अविभाजित मारहराथा और १८५६ कानून की धारा 10 के तहत सराय अगहट से  वापस मारहरा  बना दिया और आदेश के अनुसार ०१/०४/१९०९ में मारहरा  नगर पालिका परिषद् बना

पिलुआ क़स्बा  ,जनपद एटा

सलतनत कालीन में एक बार यहाँ आकर सूफी संत मारहरा से आकर इस जगह पर रहने लगे .और कुछ वर्षो के बाद उनका स्वास्थ्य ख़राब रहने लगा और यहाँ पर अपना शारीर छोड़ दिया |उनको दफना दिया और चुगलखोरों ने यहाँ पर एकछोटी मिटटी की दरगाह बना दी तथा उस जगह पर मज़ार प्रसिद्द होने लगी इस जगह पर अतीक अहमद ठेकेदार ने १९६८ में मस्जिद दरगाह (मज़ार )का निर्माण करवायाऔर सूफी लोगो के लिए एक कमरा बनबाया|पिलुआकेसैय्यदबाबा नाम से जाने जाते हैं हज़रत सैय्यदशाह अली मालिकुट्टानी के नाम से जाने जाता  हैं |

( पिलुआ शरीफ  ) के नाम से जाने जाते हैं .यहाँ पर डाकखाना भी हैं ,जिसका पिन कोड २०७२२५ हैं.यहाँ सरकारी अस्पताल भी हैं यहाँ पुलिस स्टेशन भी हैं .आबादी १०००० के लगभग हैं .एटा से 10 किमी दूर हैं .अब यह परगना नाम से तहसील    में  २०१९ सेदर्ज हैं अब यह तहसील में क़स्बा में दर्ज हैं अब यह नगर पंचायत बनना बाकि है

सन १९५२-एटा जनपद का रोड मार्ग

एटा से कासगंज रोड-

जी .टी.रोड-

टूंडला से सैबा रोड –

एटा से अलीगढ रोड

एटा से शिकोहाबाद रोड –

 

 

मारहरा गाँव ,जनपद एटा (उ .प्र.)

तत्कालीन खिलजी कल में अलाउद्दीन खिलजी  ने स्वरूपगंज को नष्ट करवा दिया था तथा बाद में जगह का नाम “मारहरा नाम ”से (खंडहर गाँव ) को रखा .उस समय एक जमींदार (राजा की पदवी ,नरेश ) हुआ करते थे

तब मारहरा का कोई नाम नहीं थे तथा उसके आस -पास कोई गाँव नहीं था और कुछ समय बाद बंजारे आकर रहने लगे .फिर वही से इसकी शुरुआत हुई धीरे -धीरे यह गाँव का रूप में बदला राजा स्वरुप सिंह ने अपने नाम पर स्वरूपगंज रख दिया एक दिन  अलाउद्दीन खिलजी की सेना(कारवा) गुजर रहा था बंजारों का दल उनका राशन आदि सामान को आक्रमण करके लूट लिया तब दिल्ली सल्तनत में अलाउदीन खिलजी को खबर लगी.तो उसने स्वरूपगंज की आबादी (बंजारों )को फरमान दिया.तथा उसकी सेना ने स्वरूपगंज को खंडहर में तब्दील कर दिया बाद में उसके एक सरदार ने अलाउदीन खिलजी से यह खंडहर गाँव को जागीर के रूप में प्राप्त किया और उसने इसका पुनरुद्धार किया उसने मारहरा गाँव फिर बसाया

मारहरा-शाब्दिक अर्थ – (तुर्की शब्द ) ,

जिसका अर्थ यह हैं कि –

“मार -आबादी

हरा-पुनर्निर्माण द्वारा जीवित करना ”

 मार-हरा कहा जाना लगा ,बिगड़ते -बिगड़ते  मारहरा कहा जाने लगा अतरंजी खेड़ा ,एटा जनपद

एटा  से लगभग 10 मील दूर काली नदी के तट पर बसा हुआ अति प्राचीन नगर हैं .इस नगर की नीव डालने वाले राजा बेन को कहा जाता हैं जिसके विषय में रूह्ल्खंड में अनेक कथाये प्रचलित हैं कहा जाता हैं की राजा बेन ने कन्नौज के आक्रमण के समय परास्त किया था किन्तु अंत में बदला लेकर मुहम्मद गौरी ने राजा बेन को हराया उसके नगर को नष्ट कर दिया अतरंजी खेडा में एक ढूह (गडढा )के अन्दर से हसरत हसन का मकबरा निकला इस लड़ाई में मारा गया |कुछा लोगों कहना हैं कि अतरंजी खेडा वही स्थान हैं ,जिसका वर्णन चीनी यात्री युवान्च्वांग ने  “पी-लो-शा-ना  या विलोश्ना किया हैं किन्तु यह धारणा गलत हैं -सिद्ध हो चुका हैं कियेह दुश्र स्थान प्राचीन स्थान बिल्सड  नमक नगर से था जो एटा से 30 मील दूर हैं |किन्तु फिर भी अतरंजी खेड़ा  के पूर्व मुस्लमान कल का नगर होने का संदेह नहीं हैं .क्योकि यह टीला के विशाल खंडहरों के उत्खनन में जो विस्तृत तिला के रूप में हैं

टीला की लम्बाई ३६० फुट ,1500फुट  चौड़ाई ,और ६५ फुट ऊचा  हैं .शुंग ,कुषाण ,और गुप्तकालीन  मिटटी की मूर्तिया ,सिक्के ,ठप्पे ईट  के टुकड़े,आदि बड़ी संख्या में प्राप्त हुए . खंडहर के एक सिरे पर शिवमंदिर के अवशेष हैं ,जिसमे पांच शिवलिंग  हैं .इनमे से  9 फुट उचां  हैं

टीले की रुपरेखा से जान पड़ता हैं ,की यह प्राचीन स्थान पहले एक विशाल नगर बसा हुआ था

सत्रोत -विजेन्द्र सिह  माथुर

अतरंजी खेडा का चित्र -1

 

अतरंजी खेडा का चित्र -2

 

अतरंजी खेडा का चित्र ३

अतरंजी खेडा का चित्र -४

 

अतरंजी खेडा का चित्र -5

 

अतरंजी खेडा का चित्र 6

 

अतरंजी खेडा का चित्र -7

 

लौह युग - विकिपीडियाअतरंजी खेडा का चित्र -8

 

Map showing location of Atranjikhera and Jakhera (After R. Tewari 2003). |  Download Scientific Diagram

अतरंजी खेडा का चित्र -9

 

Atranjikhera - Historical South Asia

 

अतरंजी खेडा का चित्र -10

 

Divodāsa on Twitter: "This is remains of a ~2300 years old Mauryan era  kitchen in a house from ancient city of Atranjikhera in modern Uttar  Pradesh. Cooking hearths, storage jar etc are

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

अतरंजी खेडा का चित्र -11

सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थल — २ सांस्कृतिक-ऐतिहासिक स्थल - अध्ययन

 

अतरंजी खेडा का चित्र -12

 

 

अतरंजी खेडा का चित्र -13

 

प्राचीन भारत के ऐतिहासिक पुरास्थल | Historical Sites of Ancient India in  hindi | Ancient sites in hindi - Gs Center

अतरंजी खेडा का चित्र -14

एटा के पर्यटन स्थल अतरंजीखेड़ा पर मेले का आयोजन – KNLS LIVE

अतरंजी खेडा का चित्र -15

कालिंजर - भारतकोश, ज्ञान का हिन्दी महासागर

अतरंजी खेडा का चित्र -16

सतनाम सिंह रामधारी | Facebook

अतरंजी खेडा का चित्र -17

 

 

 

अतिरंजीखेड़ा के विस्तृत भू-भाग में फ़ैले पुरातात्विक अवशेष ईंट और टेरकोटा  के टुकड़े गवाह हैं अपने इतिहास और रंज के

अतरंजी खेडा का चित्र -19

 

 

 

 

नाम -

जन्म -

स्थान-

पिता –

माता-

पत्नी –

पद-

विवाह –

शिक्षा-

करियरनामा –

 


 एटा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक

सूची वर्ष 1947 से अब तक के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ,जनपद एटा

क्रमसंख्या

नाम

आईपीएस-बैच

कबसे

कबतक

1

श्री  करम सिंह

15/07/1947

07-02-1948

2

श्री  एस .टन्डन

07-02-1948

09-01-1949

 श्री बी.एम्.शर्मा

09-01-1949

04-07-1951

4

हरपाल सिंह

04-07-1951

10-10-1952

5

जे.एम् .जैन

10-10-1952

03-01-1955

6

ई.जे .मुकुंद

03-01-1957

03-10-1957

7

आर .डी .पाण्डेय

03-10-1957

20/06/1958

8

जे.एम्.चतुर्वेदी

20/06/1958

07-05-1959

9

 एस.डी .दीक्षित

07-05-1959

04-08-1960

10

आर.बी.गोविल

04-08-1960

11

जी .के.वाजपेयी

21/06/1961

12

श्री  तुषार दत्त

08-08-1963

13

विजय सिंह

3/71964

14

श्री  सोमप्रकाश

15

ए.एल.शाह

16

जे .एन .अवस्थी

17

जे.के.पी.सिंह

18

एल.पी.पाण्डेय

19

जी.के.शुक्ला

२०

सी .एल.प्रदयोत

२१

आर.एस .पुष्कर

22

आर.एन.शर्मा

23

छोटे लाल

२४

एस.के.त्रिपाठी

२५

आई .पी.भटनागर

२६

जी.एल.शर्मा

२७

डी .के.तिवारी

२८

आर.सी.बनौधा

२९

विक्रम श्रीवास्तव

३०

विक्रम सिंह

३१

विक्रम सिंह (दोवारा  )

३२

के.एन.राय

३३

योगेन्द्र पाल

३४

एम्.डी .मौर्या

३५

पी.पाल

३६

एस.के.रिज़वी

३७

एम्.एस.बाली

३८

बी.बी.दास

३९

ओ.पी.दीक्षित

४०

जमाल अशरफ

४१

आर .एन कठोरिया

४२

जे.एल.त्रिपाठी

४३

के.एल.मीणा

४४

डॉ.चन्द्रिका राय

४५

आर .एन. श्रीवास्तव

४६

आर.एस.त्रिपाठी

४७

वी .के.शर्मा

४८

पी .वी. रमाशाश्त्री

४९

सत्यनारायण दुबे

५०

डी .एस.चौधरी

५१

बी.वी .बक्शी

५२

एम् .के.बशाल

५३

आर.आर .वर्मा

५४

रामजी लाल अति .प्रभार

५५

एस.पी .शर्मा

५६

आर .एस.मीणा

५७

आर .के.विश्वकर्मा

५८

एम्.जे.अख्तर

५९

आनंद स्वरुप

६०

पीयूष आनंद

६१

आर .पी .श्रीवास्तव

६२

बृजराज

६३

एस.के.त्यागी

६४

पी.के.श्रीवास्तव

६५

आनंद स्वरुप

६६

विजय सिंह मीणा

६७

आर .के.रॉय

६८

अशोक कुमार सिंह

६९

राजा श्रीवास्तव

७०

राजकुमार

७१

राजेंद्र प्रताप सिंह

७२

आर.पी.चतुर्वेदी

७३

राजेंद्र प्रताप सिंह

७४

रमित शर्मा

७५

सुशील कुमार सिंह

७६

सत्येन्द्र वीर सिंह

७७

आर.के.चतुर्वेदी

17/07/2008

७८

७९

८०

 

                                                   

 

एटा  के बाज़ार                                                                  

§  अलीगंज

§   बरहन

§   बाबसा

§  बसुन्धरा

§   बागवाला

§  सकिट

§  सोरो

§  पिलुआ

§  जलेसर

§  अवागढ़

§  मलावन

§  जैथरा

§  धुमरी

§  अलीगंज

§  शकरौली

§  रिजोर

§  मिरहची

§  मारहरा

§  अवागढ़

§  सरायअगहत

§  राजा का रामपुर

§  निधौली कलां

एटा जनपद के राजनीतिक लोग

Biographical Sketch

Member of Parliament

12th Lok Sabha

 

 

 

 

 

 

 

SHAKYA, SHRI MAHADEEPAK SINGH

[BHARATIYA JANATA PARTY - ETAH (UTTAR PRADESH)]

 


Father's Name          Shri Jodh Singh Shakya

 

Date of Birth          25 July 1922

 

Place of Birth              Agounapur, Distt. Etah(Uttar Pradesh)

 

Marital Status         Married on 7 January 1947

 

Spouse's Name          Smt. Vidya Devi Shakya

 

Children               Three sons and one daughter

 

Educational Qualifications    

 

               M.A. (Hindi), Ratna Ayurvedeacharaya

 

               Educated at Jawaharlal Degree College,

               Etah (Uttar Pradesh) and Akhil Bharatiya                Ayurveda Vidyapeeth, Delhi

 

Profession

       

               Agriculturist, Medical Practitioner, Political

               and Social Worker, Sportsman

 

Permanent Address          

 

              VILLAGE   Agaonapur, Distt. Etah-207001

              (Uttar Pradesh)

 

              Tel. (05742) 285201

 

Present Address

 

              22, Dr   R.P. Road,

              New Delhi-110001

 

              Tel. (011) 3782125

 

Positions Held

 

1971          Elected to 5th Lok Sabha

 

               Member, Public Health Committee

 

1974           Member, Railway Advisory Committee

 

               Member, Committee on Estimates

 

               Member, Joint Committee on Customs Tariff Bill, 1975

 

1977           Re-elected to 6th Lok Sabha (2nd term)

 

1983-84        President, Bharatiya Janata Party (B.J.P.),

        Distt. Etah

 

1989           Re-elected to 9th Lok Sabha (3rd term)

              

1989-91        Member, Committee on Government Assurances

 

               Member, Consultative Committee, Ministry of Civil

               Aviation

 

               Member, Committee on Human Resource Development

 

1991           Re-elected to 10th Lok Sabha (4th term)

 

1996           Re-elected to 11th Lok Sabha (5th term)

 

1998           Re-elected to 12th Lok Sabha (6th term)

 

1998-99 and    Member, Committee on Estimates

1999-2000

 

1998-99        Member, Committee on Human Resource Development

               and its Sub-Committee-II on Medical Education

 

               Member, Consultative Committee, Ministry of

               Civil Aviation

 

Special Interests

 

Literature, Poetry and sports

 

Sports and Clubs

 

Football, volley ball and wrestling

 

Countries Visited

 

Malaysia, U.A.E., U.K. and U.S.A.


Election Result of

Etah   Lok Sabha Constituency

 

Total electorate       10,29,503

Total votes polled      6,78,348

 

Votes polled in favour of the first four leading candidates

 

(1) Shri Mahadipak Singh Shakya (B.J.P.) 2,86,982

(2) Shri Devendra Singh Yadav         (S.P.)   2,74,842

(3) Shri Raghunath Singh Lodhi         (B.S.P.)   59,807

(4) Shri Kunwar Pal Singh       (I.N.C.)    7,662


 

 

 

 

 

 

एटा सीट से छह बार के सांसद रहे डा. महादीपक सिंह शाक्य का निधन

AuthorTanu Gupta Publish Date: Tue, 10 Nov 2020 02:44 PM (IST)Updated Date: Tue, 10 Nov 2020 02:44 PM (IST)

डॉ महादीपक सिंह शाक्य एटा लोकसभा सीट से छह बार सांसद रहे थे।

डॉ महादीपक सिंह शाक्य एटा लोकसभा सीट से छह बार सांसद रहे थे। मंगलवार दोपहर एटा स्थित आवास पर अंतिम सांस ली। कल सुबह पैतृक गांव अगोनापुर में होगी अंत्येष्टि। वे काफी समय से बीमार चल रहे थे।

आगरा, जेएनएन। पूर्व सांसद डा. महादीपक सिंह शाक्य (98) नहीं रहे। उन्होंने अपने एटा स्थित आवास पर अंतिम सांस ली। महादीपक ने छह बार एटा लोकसभा का प्रतिनिधित्व किया।

एटा की राजनीति में लकी स्टार माने जाने वाले महादीपक की तबियत काफी समय से खराब चल रही थी। उनके निधन के वक्त परिवार के अधिकांश सदस्य मौजूद थे। महादीपक सिंह शाक्य जनसंघ और भाजपा से 6 बार सांसद रहे हैं। वर्ष 1981 से लेकर 1998 तक का दौर ऐसा था जब देश में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल था। उस समय महादीपक लगातार चार बार जीते, इससे पहले दो बार सांसद रहे। 1977 में वे भारतीय लोकदल से भी जीते थे। एटा लोकसभा सीट पर बड़े से बड़े दिग्गजों को उन्होंने हराया। वर्ष 2019 के आम चुनाव से पहले वे कुछ समय के लिए भाजपा से नाराज हो गए और सपा के साथ चले गए मगर जब लोकसभा का चुनाव आया तो फिर से भाजपा के पक्ष में खड़े दिखाई दिए। महादीपक को सिद्धांतवादी राजनीति के लिए जाना जाता है। उन्होंने राजनीति जनसंघ से शुरू की थी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई और पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के साथ सदन में मौजूदगी रहती थी। महादीपक वरिष्ठ सांसद थे, उन्हें संसद की विभिन्न समितियों में हमेशा स्थान मिला मगर केंद्र सरकार में कभी मंत्री नहीं बने और कभी इस तरह की खबरें भी नहीं आईं कि उन्होंने मंत्री बनने के लिए नेतृत्व से बिगाड़ी हो। उनके निधन के बाद आवास पर राजनीतिक दलों के नेताओं, भाजपा कार्यकर्ताओं की भीड़ है। बुधवार सुबह अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव अगोनापुर में किया जाएगा।

हर रोज करते थे योग

महादीपक सिंह शाक्य जब तक स्वस्थ थे तब तक निरंतर योग करते रहे। पिछले साल एक मुलाकात में उन्होंने कहा भी था मेरे फिट रहने का राज योग है। वे डेढ़ से दो घंटे तक योग करते थे।

एटा से डा. देवेंद्र यादव होंगे सपा के प्रत्याशी

Updated Tue, 26 Mar 2019 11:12 PM IST

एटा से डा. देवेंद्र यादव होंगे सपा के प्रत्याशी

 

एटा से डा. देवेंद्र यादव होंगे सपा के प्रत्याशी

 

                        
एटा से डा. देवेंद्र यादव होंगे सपा के प्रत्याशी - फोटो : अमर उजाला

एटा। लंबी जद्दोजहद के बाद एटा लोकसभा क्षेत्र से सपा का प्रत्याशी घोषित हो गया। दोपहर बाद सपा द्वारा जारी की गई तीन सीटों में एटा का नाम भी शामिल था। एटा सीट से सपा ने दो बार के सांसद डॉ. देवेंद्र सिंह यादव को समाजवादी पार्टी का प्रत्याशी बनाया है।

जिसकी उम्मीद थी, वही हुआ। सैफई परिवार के करीबी देवेंद्र सिंह एक बार फिर टिकट पाने में कामयाब रहे। इनकी दावेदारी को चुनौती दे रहे पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह यादव, पूर्व मंत्री मानपाल सिंह, डा.श्याम सिंह शाक्य, डा.नवल किशोर शाक्य सहित आधा दर्जन दावेदार पीछे छूट गए। रामेश्वर सिंह की दावेदारी को राष्ट्रीय महासचिव प्रो.रामगोपाल यादव के समर्थन के चलते खासा मजबूत माना जा रहा था। एक दशक से फर्रुखाबाद से चुनावी तैयारी कर रहे रामेश्वर बसपा कोटे के चलते वहां निराश रहे। बताते हैं कि प्रो. रामगोपाल ने तभी इन्हें एटा से टिकट का आश्वासन देकर तैयारी के निर्देश दिए थे। और यह चुनाव प्रचार में जुट गए।

कांग्रेस से शुरू कॅरियर, बसपा से भी लड़ चुके हैं चुनाव
कांग्रेस से कैरियर शुरू करने वाले देवेंद्र सिंह 1989 में पटियाली विधानसभा से विधायक चुने गए। 1991 1993 में भाजपा के रज्जन पाल सिंह चौहान से हारने के बाद 1996 में सपा से विधायक चुने गए। इसी दौरान 1999 में हुए लोकसभा चुनावों में सपा ने इन पर दांव लगाकर पहली बार एटा सीट पर कब्जा किया। 2004 लोकसभा चुनाव में फिर सपा का परचम लहराने वाले देवेंद्र 2009 में टिकट न मिलने पर बसपाई हो गए। और सपा समर्थन से चुनाव लड़े कल्याण को चुनौती दी। लेकिन हार गए। 2014 में भाजपा प्रत्याशी कल्याण पुत्र राजवीर सिंह से सपा प्रत्याशी के रूप में हारे देवेंद्र इस बार भी राजवीर सिंह के सामने होंगे।
हर दल में देवेंद्र की पहुंचराजनेता एवं उद्योगपति देवेंद्र की अधिकांश दलों में पैठ है। इसी के चलते वे जब चाहे टिकट पाने व दिलाने में सफलरहे हैं। 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा से टिकट न मिलने पर देवेंद्र सिंह ने अपनी बेटी को पटियाली विधानसभा से कांग्रेस का चुनाव लड़वाया। यहीं से 2017 में अपनी बड़ी बेटी किरन को सपा से चुनाव लड़ाया। आईएएस व आईपीएस रिश्तेदारों के चलते ब्यूरोक्रेट्स से भी अच्छे रसूख हैं।
दो बार के सांसद एवं दो बार विधायक रहे देवेंद्र सिंह मजबूत प्रत्याशी हैं। कार्यकर्ताओं का उत्साह एवं गठबंधन के समीकरण हमारे पक्ष में हैं। बड़ी जीत का इतिहास रचेंगे।

अशरफ हुसैन, जिलाध्यक्ष, सपा

 

 

  

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