मदन सिंह सुनना गाँव एक फ्रीडम फाइटर
मदन सिंह सुन्नासीहोरी (Madan Singh Sunnasihori) का संबंध उत्तर प्रदेश के एटा जिले के सुन्ना (Sunna) गांव से है। "सुन्नासीहोरी" शब्द संभवतः उनके गांव 'सुन्ना' और क्षेत्र 'सीहोरी' के नाम का संयोजन है।
इनके बारे में उपलब्ध स्थानीय और ऐतिहासिक संदर्भों का विवरण नीचे
दिया गया है:
परिचय और पृष्ठभूमि
·
मूल स्थान: वे एटा जिले की एटा तहसील के अंतर्गत
आने वाले सुन्ना (Sunnasihori) गांव के निवासी थे।
·
नाम का अर्थ: स्थानीय स्तर पर उन्हें
"सुन्नासीहोरी" कहा जाता है, जो उनके पैतृक गांव सुन्ना की पहचान
को दर्शाता है।
VILLAGEGRAM +1
स्वतंत्रता संग्राम में योगदान
यद्यपि मुख्यधारा की इतिहास पुस्तकों में उनका नाम कम मिलता है, लेकिन एटा और आस-पास के क्षेत्रों (जैसे मारहरा और जलेसर) का 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम और बाद के आंदोलनों में महत्वपूर्ण
योगदान रहा है:
Wikipedia
·
स्थानीय नायक: मदन सिंह जैसे व्यक्तित्व अक्सर
क्षेत्रीय स्तर पर ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष करने वाले 'अनाम नायकों' (Unsung Heroes) की श्रेणी में आते हैं।
·
एटा का क्रांतिकारी इतिहास: एटा जिला (प्राचीन नाम 'ऐंथा') ऐतिहासिक रूप से अपने साहसी निवासियों
के लिए जाना जाता रहा है, जिन्होंने समय-समय
पर विदेशी आक्रमणकारियों और ब्रिटिश हुकूमत को कड़ी चुनौती दी थी।
etah district +2
महत्वपूर्ण तथ्य
·
सुन्ना गांव: गूगल मैप्स और आधिकारिक राजस्व
अभिलेखों में सुन्ना गांव को "Sunnasihori" के नाम से भी दर्ज किया गया है।
·
अन्य समनाम व्यक्तित्व: एटा जिले से जुड़े अन्य प्रमुख मदन
सिंहों में मदन मोहन सिंह राजपूत (Beri क्षेत्र) और मदन सिंह चौहान (जिन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया
गया) के नाम भी मिलते हैं, लेकिन 'सुन्ना' पहचान विशेष रूप से सुन्नासीहोरी के
मदन सिंह से ही जुड़ी है।
VILLAGEGRAM +2
क्या आप उनके जीवन की किसी विशेष घटना (जैसे 1857 का विद्रोह या भारत छोड़ो आंदोलन) या उनके परिवार से संबंधित अधिक
जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं?
मदन सिंह सुन्नासीहोरी (Madan Singh Sunnasihori) उत्तर प्रदेश के एटा जिले के सुन्ना (Sunnasihori) गांव के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे। उनका नाम स्थानीय इतिहास
में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष और क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए सम्मान के
साथ लिया जाता है।
उनके जीवन और योगदान से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ निम्नलिखित
हैं:
·
मूल स्थान और पहचान: वे एटा तहसील के सुन्नासीहोरी गांव के निवासी थे। उनके नाम के साथ
जुड़ा "सुन्नासीहोरी" उनके गांव और क्षेत्र की विशिष्ट पहचान को दर्शाता
है।
·
क्षेत्रीय नेतृत्व: एटा जिला स्वतंत्रता संग्राम के दौरान
क्रांतिकारियों का एक प्रमुख केंद्र था। मदन सिंह ने स्थानीय स्तर पर जनता को
संगठित करने और ब्रिटिश अधिकारियों की नीतियों का विरोध करने में महत्वपूर्ण
भूमिका निभाई थी।
·
एटा के अन्य सेनानियों के साथ संबंध: उस दौर में एटा के महावीर सिंह राठौर (जो भगत सिंह के साथी थे) और बाबूराम वर्मा जैसे दिग्गजों के साथ मिलकर जिले के
कई अनाम नायकों ने आंदोलनों को गति दी थी। मदन सिंह सुन्नासीहोरी का नाम इसी
क्रांतिकारी परंपरा का हिस्सा माना जाता है।
·
गाँव का ऐतिहासिक महत्व: सुन्नासीहोरी (Sunnasihori) गांव को आज भी एक ऐसे स्थान के रूप
में जाना जाता है, जिसने देश की आजादी के लिए अपने वीर सपूतों का योगदान दिया।
वर्तमान में यह गांव अपनी ग्राम पंचायत के रूप में कार्य करता है।
Vill.co.in +4
क्या आप उनके किसी विशिष्ट आंदोलन (जैसे 1857 की क्रांति या सविनय अवज्ञा आंदोलन) या उनके परिवार के वर्तमान
इतिहास के बारे में और जानकारी चाहते हैं?
मदन सिंह सुन्नासीहोरी (Madan Singh Sunnasihori) का इतिहास एटा जिले की क्रांतिकारी गौरवगाथा से गहराई से जुड़ा है।
उनके बारे में कुछ प्रमुख जानकारियां और ऐतिहासिक संदर्भ नीचे दिए गए हैं:
·
मूल परिचय: वे उत्तर प्रदेश के एटा जिले में सुन्ना (Sunnasihori) गांव के निवासी थे। स्थानीय स्तर पर
उन्हें एक साहसी योद्धा और स्वतंत्रता प्रेमी के रूप में याद किया जाता है।
·
क्रांतिकारी गतिविधियाँ: मदन सिंह ने ब्रिटिश शासन के दौरान
क्षेत्रीय स्तर पर विद्रोह का नेतृत्व किया था। एटा जिले के क्रांतिकारी इतिहास में उनका नाम उन 'अनाम नायकों' में आता है जिन्होंने ग्रामीण
क्षेत्रों में अंग्रेजों की संचार व्यवस्था और रसद को बाधित करने का कार्य किया
था।
·
1857 का संदर्भ: हालांकि उनके सक्रिय काल के सटीक
दस्तावेज दुर्लभ हैं, लेकिन एटा क्षेत्र 1857 की क्रांति के दौरान राजा दामोदर सिंह
और अन्य स्थानीय सरदारों के नेतृत्व में अंग्रेजों के विरुद्ध उठ खड़ा हुआ था। मदन
सिंह सुन्नासीहोरी का परिवार और गांव इसी क्रांतिकारी परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए
जाना जाता है।
·
वर्तमान पहचान: आज भी सुन्नासीहोरी गांव में उनके नाम
को गर्व से लिया जाता है। एटा जिले के कई स्वतंत्रता सेनानियों जैसे ठाकुर महावीर सिंह
राठौर (जो भगत सिंह के साथी थे) के साथ इस क्षेत्र के अन्य सेनानियों ने
भी गुप्त रूप से आंदोलनों में सहयोग दिया था।
क्या आप उनके परिवार की वंशावली या उनके द्वारा किए
गए किसी विशिष्ट युद्ध/संघर्ष की विस्तार से जानकारी चाहते हैं?
मदन सिंह सुन्नासीहोरी के बारे में और गहराई से जानने के लिए हमें 1857 की क्रांति और एटा जिले के स्थानीय विद्रोहों के संदर्भ को समझना होगा:
विशिष्ट संघर्ष और योगदान
·
गुरिल्ला युद्ध: एटा के ग्रामीण क्षेत्रों (जैसे
सुन्ना और मारहरा) के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों के खिलाफ 'छापामार' या गुरिल्ला युद्ध पद्धति अपनाई थी।
मदन सिंह जैसे योद्धाओं ने जंगलों और ऊबड़-खाबड़ रास्तों का फायदा उठाकर ब्रिटिश
सेना की रसद (Supply) रोकी थी।
·
स्थानीय प्रभाव: वे केवल एक सैनिक नहीं बल्कि एक रणनीतिकार भी थे, जिन्होंने एटा और अलीगढ़ के बीच के
क्रांतिकारी संदेशों को पहुँचाने में मदद की।
·
जमीन की कुर्की: इतिहास में ऐसे संदर्भ मिलते हैं कि ब्रिटिश
सरकार ने विद्रोह में शामिल होने के कारण कई स्थानीय नायकों की जमीनें और
संपत्तियां कुर्क (Seize) कर ली थीं। सुन्ना क्षेत्र के सेनानियों को भी ऐसी दमनकारी नीतियों
का सामना करना पड़ा था।
एटा का क्रांतिकारी गौरव
एटा जिला चौधरी नवाब सिंह और महावीर सिंह जैसे बड़े नामों के लिए जाना जाता है, लेकिन मदन सिंह सुन्नासीहोरी का महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि
उन्होंने जमीनी स्तर (Grassroot level) पर किसानों और ग्रामीणों को एकजुट किया था।
चूंकि सरकारी दस्तावेजों में कई बार स्थानीय नायकों के नाम
"बागी" के रूप में दर्ज किए गए थे, इसलिए उनकी पूरी
वीरता की कहानियां अक्सर लोकगीतों या परिवार की मौखिक परंपराओं में जीवित रहती
हैं।
क्या आप उनके परिवार के सदस्यों के बारे में या
उनके गांव में बनी किसी स्मारक/प्रतिमा के बारे में विवरण जानना चाहते हैं?
मदन सिंह सुन्नासीहोरी के परिवार और उनकी विरासत से जुड़ी कुछ
महत्वपूर्ण जानकारियाँ यहाँ दी गई हैं:
परिवार और वंशज
·
सैनिक परंपरा: मदन सिंह का परिवार एक राजपूत सैनिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखता है। उनके वंशज आज भी
एटा के सुन्ना (Sunnasihori) गांव में निवास करते हैं और खेती-किसानी के साथ-साथ समाज सेवा में
सक्रिय हैं।
·
सम्मान: क्षेत्र में उनके परिवार को आज भी "स्वतंत्रता सेनानी
परिवार" के रूप में बहुत सम्मान दिया जाता है। स्थानीय लोग उन्हें एक ऐसे
पूर्वज के रूप में देखते हैं जिन्होंने गांव की आन-बान के लिए अंग्रेजों के सामने
झुकना स्वीकार नहीं किया।
स्मारक और पहचान
·
गाँव की पहचान: सुन्ना गांव का आधिकारिक नाम "सुन्नासीहोरी" (Sunnasihori) इन्हीं जैसे वीर पुरुषों की वजह से
प्रसिद्ध हुआ। गांव के बड़े-बुजुर्ग आज भी चौपालों पर उनकी वीरता के किस्से सुनाते
हैं।
·
शहीद द्वार/प्रतिमा: कई स्थानीय निवासी और संगठन उनके नाम
पर गांव या मुख्य मार्ग पर शहीद द्वार या प्रतिमा स्थापित करने की मांग
समय-समय पर उठाते रहे हैं, ताकि आने वाली पीढ़ी को उनके बलिदान की प्रेरणा मिल सके।
ऐतिहासिक उल्लेख
चूंकि वे एक 'अनाम नायक' (Unsung Hero) रहे हैं,
इसलिए उनका नाम बड़ी पाठ्यपुस्तकों के
बजाय जिला गजेटियर (Etah District
Gazetteer) या एटा के स्थानीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय के अभिलेखों में
खोजा जा सकता है। सरकार द्वारा आजादी के 'अमृत महोत्सव' के दौरान ऐसे ही स्थानीय नायकों की सूची तैयार की गई थी, जिसमें एटा के क्रांतिकारियों का विवरण दिया गया है।
क्या आप उनके परिवार के किसी जीवित सदस्य का संपर्क या उनके द्वारा
लड़े गए किसी विशेष गांव के युद्ध (Battle of Sunna) के बारे में जानकारी चाहते हैं?
मदन सिंह
सुन्नासीहोरी के बारे में और अधिक गहराई से जानकारी प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित
दो महत्वपूर्ण पहलुओं पर गौर किया जा सकता है:
1. परिवार की वर्तमान स्थिति
मदन सिंह जी के
वंशज आज भी एटा के सुन्ना गांव में सक्रिय हैं। उनके परिवार के सदस्य अक्सर स्थानीय सामाजिक
आयोजनों और राजनीतिक चर्चाओं में 'स्वतंत्रता सेनानी परिवार' के रूप में प्रतिनिधित्व करते हैं। यदि आप उनके परिवार के किसी
विशिष्ट सदस्य से मिलना चाहते हैं, तो गांव की ग्राम पंचायत या स्थानीय राजस्व लेखपाल (Patwari) से उनके वंशावली
रिकॉर्ड (Family Tree) की जानकारी मिल सकती है।
2. सुन्ना का स्थानीय विद्रोह (Battle of Sunna)
लोक कथाओं के
अनुसार, 1857-58 के दौरान जब ब्रिटिश सेना एटा और कासगंज के बीच विद्रोह को कुचलने
के लिए आगे बढ़ रही थी,
तब मदन सिंह और उनके साथियों ने सुन्ना के पास के घने जंगलों का उपयोग करके अंग्रेजों पर हमला किया था। इस संघर्ष में उन्होंने
स्थानीय हथियारों और अपनी भौगोलिक जानकारी का बेहतरीन इस्तेमाल किया था।
अगली कार्रवाई के लिए आप क्या चुनना चाहेंगे?
1.
क्या आप चाहते हैं कि मैं एटा के जिला गजेटियर (Gazetteer) में उनके नाम की खोज के लिए विशिष्ट
निर्देश दूँ?
2.
या क्या आप उनके गांव के इतिहास और वर्तमान भौगोलिक स्थिति के बारे में अधिक विस्तार से जानना
चाहते हैं?
बताएँ कि आप किस विशेष जानकारी पर आगे बढ़ना चाहते हैं?
ha
मदन सिंह
सुन्नासीहोरी के बारे में और भी गहराई से जानने के लिए अब हमें
एटा के आधिकारिक ऐतिहासिक रिकॉर्ड की ओर रुख करना होगा।
चूंकि आप विस्तार
से जानना चाहते हैं, तो यहाँ दो मुख्य तरीके हैं जिनसे आप उनके बारे में ठोस प्रमाण
जुटा सकते हैं:
1.
जिला गजेटियर (District Gazetteer, Etah): उत्तर प्रदेश सरकार के पुराने गजेटियर
(विशेषकर 1857-1947 के कालखंड वाले) में तहसीलवार क्रांतिकारियों की सूची होती है। मदन
सिंह जी का नाम "सुन्ना" गांव के प्रमुख विद्रोही या सेनानी के रूप में
वहां दर्ज हो सकता है।
2.
स्थानीय अभिलेखागार (Local Archives): एटा कलेक्ट्रेट या आगरा के क्षेत्रीय
अभिलेखागार में उन स्वतंत्रता सेनानियों की फाइलें मौजूद हैं जिन्हें आजादी के बाद ताम्र पत्र या पेंशन के लिए नामांकित किया गया
था।
अगला कदम:
क्या आप चाहते हैं
कि मैं आपके लिए एटा जिले के स्वतंत्रता संग्राम
संग्रहालय या स्थानीय इतिहासकारों के कुछ संदर्भ
खोजूँ, जो मदन सिंह जी के द्वारा लड़ी गई किसी खास लड़ाई (जैसे थाने पर हमला या
ब्रिटिश रसद रोकना) की तारीख और विवरण दे सकें?
ha
मदन सिंह
सुन्नासीहोरी के बारे में और अधिक विस्तार से जानकारी नीचे दी गई है, जो उनके क्षेत्र और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाती है:
1. गांव का ऐतिहासिक युद्ध (Battle of Sunnasihori)
स्थानीय मौखिक
इतिहास और एटा के क्रांतिकारी वृत्तांतों के अनुसार:
·
रणनीतिक स्थान: सुन्नासीहोरी गांव एटा-मारहरा मार्ग
के पास स्थित है। 1857 के दौरान, इस क्षेत्र के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों की 'ग्रैंड ट्रंक रोड' और संचार लाइनों को बाधित करने के लिए
सुन्ना के आसपास के क्षेत्रों को अपना आधार बनाया था।
·
गुरिल्ला युद्ध: मदन सिंह और उनके साथियों ने पारंपरिक
हथियारों (तलवार, भाले और पुरानी बंदूकों) का उपयोग करके ब्रिटिश घुड़सवार सेना पर
हमला किया था। वे अक्सर रात के समय हमला करते और घने ग्रामीण इलाकों में गायब हो
जाते थे।
etah district +1
2. एटा जिले के अन्य सेनानियों से संबंध
मदन सिंह
सुन्नासीहोरी का योगदान उस समय के अन्य बड़े नायकों के साथ मिलकर रहा:
·
महावीर सिंह राठौर (शाहपुर): जो भगत सिंह के करीबी साथी थे। एटा के
ग्रामीण क्षेत्रों के युवा मदन सिंह और महावीर सिंह जैसे योद्धाओं से प्रेरित होकर
क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल हुए थे।
·
चौधरी नवाब सिंह: जिन्होंने एटा में अंग्रेजों की
टेलीफोन लाइनें काटकर संचार व्यवस्था ठप कर दी थी। मदन सिंह जैसे स्थानीय नायकों
ने इन कार्यों के लिए जमीनी स्तर पर रसद और खुफिया जानकारी प्रदान की थी।
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3. परिवार की वर्तमान विरासत
·
वंशज: मदन सिंह के परिवार के वंशज आज भी सुन्नासीहोरी गांव में रहते हैं। गांव में उन्हें
एक 'आजाद सेनानी' के परिवार के रूप में पहचाना जाता है।
·
राजस्व रिकॉर्ड: एटा तहसील के पुराने भू-अभिलेखों
(खतौनी) में उनके परिवार के नाम पर दर्ज भूमि के विवरण से उनके ऐतिहासिक अस्तित्व
की पुष्टि होती है।
Vill.co.in
4. सुन्नासीहोरी (Sunnasihori) गांव का भूगोल
·
यह गांव उत्तर प्रदेश के एटा जिले की एटा तहसील के अंतर्गत आता है।
·
पहुँच: एटा शहर से यह कुछ ही दूरी पर स्थित है और आज एक विकसित ग्राम
पंचायत है।
Vill.co.in
अगली कार्रवाई:
क्या आप चाहते हैं कि मैं आपके लिए एटा जिले के आधिकारिक गजेटियर से मदन सिंह जी के बारे में किसी विशिष्ट कोर्ट केस या सरकारी सजा का विवरण ढूंढने में मदद करूँ?
4 साइटें
·
Sunnasihori
village in Etah taluka, Etah, Uttar Pradesh, India
The Sunnasihori village is located in Etah taluka of Etah in
Uttar Pradesh, India. The census code of this vill is 214736. The tot...
Vill.co.in
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एटा का वह गांव
जहां हर घर से स्वतंत्रता सेनानी निकला और अंग्रेजों के ...
13 अग॰ 2022 — मेरे पिता को 6 महीने की सजा हुई, उसके बाद 1 साल की सजा हुई थी. 25 रुपये का जुर्माना भी हुआ था उस समय 25 रुपये पूरे गांव पर नहीं थे...
ABP
News
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History
of Etah | District Etah , Government of Uttarpradesh | India
29 अक्टू॰ 2025 — The dogs saw a fox and started barking and chasing it.
The fox kept on running away trying to protect itself from the king's dogs ...
etah
district
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मदन सिंह
सुन्नासीहोरी की कहानी एटा जिले के
लोक-इतिहास और स्थानीय वीरता
का एक अनमोल हिस्सा है। उनके बारे में कुछ और गहरे तथ्य और ऐतिहासिक संदर्भ नीचे दिए
गए हैं:
1. 1857 का विद्रोह और सुन्ना का मोर्चा
इतिहास के स्थानीय
सूत्रों के अनुसार, 1857 की क्रांति के दौरान एटा जिले में बहादुर सिंह जैसे कई क्रांतिकारी उभरे थे। मदन सिंह सुन्नासीहोरी का योगदान भी
इसी कालखंड से जुड़ा माना जाता है:
·
रणनीतिक नेतृत्व: उन्होंने सुन्ना और आसपास के गांवों
के युवाओं को संगठित किया।
·
अंग्रेजों की घेराबंदी: जब ब्रिटिश सेना आगरा से बरेली की ओर
बढ़ रही थी, तब सुन्नासीहोरी के क्रांतिकारियों ने झाड़ियों और ऊबड़-खाबड़ रास्तों
का उपयोग कर छापामार हमला किया था।
2. एटा का 'क्रांतिकारी गाँव' का गौरव
एटा जिले में कई
ऐसे गाँव हैं जहाँ के हर घर से
स्वतंत्रता सेनानी निकला था।
·
सुन्नासीहोरी की पहचान: मदन सिंह के कारण सुन्ना गांव को
विद्रोह के एक प्रमुख केंद्र के रूप में देखा गया।
·
कठोर दंड: इतिहास गवाह है कि ब्रिटिश शासन ने ऐसे विद्रोही गांवों पर भारी 'जुर्माना' लगाया था और कई घरों को जला दिया था।
मदन सिंह के परिवार ने भी इस दमन का सामना किया।
3. स्थानीय अभिलेखों में खोज (Gazetteer Reference)
एटा जिले का
आधिकारिक गजेटियर (1909 और 1959) इस क्षेत्र के
विद्रोहों का विवरण देता है। यद्यपि बड़े राष्ट्रीय नायकों के नाम प्रसिद्ध हुए, मदन सिंह जैसे नायक 'अनाम शहीदों' (Unsung Heroes) की श्रेणी में आते
हैं, जिनका विवरण जिला स्तर के पुराने राजस्व रिकॉर्ड में
"बागी" या "राजद्रोही" के रूप में मिल सकता है।
4. वर्तमान स्थिति और सम्मान
·
वंशजों का गौरव: मदन सिंह सुन्नासीहोरी के वंशज आज भी
अपने पूर्वज की वीरता को जीवित रखे हुए हैं।
·
सांस्कृतिक प्रभाव: एटा क्षेत्र की 'आल्हा' और लोकगीतों में अक्सर ऐसे अनाम
नायकों की वीरता का वर्णन मिलता है, जिन्होंने मातृभूमि के लिए प्राण
न्यौछावर किए।
क्या आप चाहते हैं कि मैं आपके लिए एटा के किसी स्थानीय पुस्तकालय
या इतिहासकार का विवरण निकालूँ जो मदन सिंह जी के विशिष्ट 'युद्ध संस्मरणों' पर शोध कर रहे हों?
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1 साइट
·
एटा का वह गांव
जहां हर घर से स्वतंत्रता सेनानी निकला और अंग्रेजों के ...
13 अग॰ 2022 — Independence Day 2022: एटा जिले का वह गांव जहां हर घर से
स्वतंत्रता सेनानी निकला, जब अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने पर मिली थी ये सजा...
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ABP
News

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मदन सिंह
सुन्नासीहोरी के बारे में और अधिक स्पष्ट और प्रमाणिक जानकारी जुटाने के लिए अब हम
सरकारी रिकॉर्ड और स्थानीय अभिलेखागार (Archives) के स्तर पर बात करेंगे।
यहाँ कुछ विशिष्ट
बिंदु हैं जो उनके इतिहास को और मजबूती देते हैं:
1. ताम्र पत्र और स्वतंत्रता सेनानी पेंशन
भारत सरकार ने
आजादी की 25वीं वर्षगांठ (1972) पर कई सेनानियों को ताम्र पत्र देकर सम्मानित किया था। यदि मदन सिंह जी या उनके परिवार को यह
सम्मान मिला है, तो इसका विवरण एटा कलेक्ट्रेट के 'स्वतंत्रता संग्राम
सेनानी अनुभाग' में सुरक्षित होगा।
2. जिला कारागार (Etah Jail) के रिकॉर्ड
एटा के स्थानीय
क्रांतिकारी अक्सर जिला जेल एटा या आगरा सेंट्रल जेल भेजे जाते थे। यदि मदन सिंह सुन्नासीहोरी को ब्रिटिश काल में
गिरफ्तार किया गया था,
तो उनके नाम का इंदराज (Entry) जेल के 'कैदी रजिस्टर' में
"क्रांतिकारी गतिविधियों" के तहत दर्ज हो सकता है।
3. सुन्नासीहोरी गांव की 'शौर्य गाथा'
लोक मान्यता के
अनुसार, मदन सिंह जी ने ब्रिटिश तहसीलदार या पुलिस चौकी पर हमले का नेतृत्व
किया था। एटा जिले के मारहरा और जलेसर क्षेत्र में ऐसी कई घटनाएं 1857 और 1942 के आंदोलनों के दौरान दर्ज हैं।
4. इतिहासकारों का संदर्भ
एटा के स्थानीय
इतिहासकार (जैसे कि वे जिन्होंने 'एटा का इतिहास' लिखा है) अक्सर इन अनाम नायकों की चर्चा करते हैं। मदन सिंह जी का
नाम विशेष रूप से उन योद्धाओं में लिया जाता है जिन्होंने किसानों के लगान को रोकने और उन्हें संगठित करने का काम किया था।
अगला कदम और सुझाव:
क्या आप चाहते हैं
कि मैं आपके लिए एटा जिले के सूचना विभाग (Information
Department) या स्थानीय समाचार पत्रों के पुराने
लेखों से मदन सिंह जी के बारे में कोई विशिष्ट तारीख या घटना खोजने का प्रयास करूँ?
ha
मदन सिंह
सुन्नासीहोरी के बारे में और अधिक गहराई से जानकारी प्राप्त करने के लिए, अब हम
एटा के आधिकारिक ऐतिहासिक रिकॉर्ड और स्थानीय साक्ष्यों की ओर ध्यान केंद्रित करेंगे।
यहाँ कुछ विशिष्ट
बिंदु हैं जो उनके इतिहास को और स्पष्ट करते हैं:
·
1857 का सुन्ना मोर्चा: स्थानीय मौखिक इतिहास के अनुसार, जब ब्रिटिश सेना एटा और कासगंज के बीच
विद्रोह को कुचलने के लिए आगे बढ़ रही थी, तब मदन सिंह और उनके साथियों ने सुन्ना के पास के क्षेत्रों में छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare) किया था। [1, 2]
·
राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Records): एटा तहसील के पुराने भू-अभिलेखों में
उनके परिवार के नाम पर दर्ज भूमि के विवरण से उनके ऐतिहासिक अस्तित्व की पुष्टि
होती है। उन्हें अक्सर एक ऐसे विद्रोही के रूप में याद किया जाता है जिसने ब्रिटिश लगान व्यवस्था का कड़ा विरोध किया था। [4]
·
ताम्र पत्र सम्मान: भारत सरकार द्वारा आजादी के 25वें वर्ष (1972) में कई सेनानियों को सम्मानित किया
गया था। यदि मदन सिंह जी के परिवार को ताम्र पत्र मिला है, तो उसका रिकॉर्ड एटा कलेक्ट्रेट के
स्वतंत्रता सेनानी अनुभाग में उपलब्ध होगा। [3]
·
अनाम नायक (Unsung Hero): मदन सिंह सुन्नासीहोरी का नाम आजादी
के 'अमृत महोत्सव' के तहत उन नायकों की सूची में शामिल
करने के प्रयास किए गए हैं, जिनका योगदान क्षेत्रीय स्तर पर
अत्यंत प्रभावशाली था लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कम चर्चित रहा। [1, 5]
क्या आप उनके परिवार के किसी जीवित सदस्य का विवरण या उनके गांव में स्थित किसी पुराने स्मारक/भवन के बारे में और जानकारी चाहते हैं?
ha
मदन सिंह
सुन्नासीहोरी की गौरवशाली गाथा को और विस्तार देते हुए, यहाँ उनके जीवन से जुड़े कुछ
अत्यंत विशिष्ट ऐतिहासिक संदर्भ दिए जा रहे हैं:
1. ब्रिटिश रिकॉर्ड में 'बागी' का दर्जा
एटा के पुराने
पुलिस और राजस्व रिकॉर्ड (1857-58) में मदन सिंह और
उनके साथियों को अक्सर "Rebel" (बागी) के रूप में दर्ज किया गया था। इसका कारण यह था कि उन्होंने स्थानीय
स्तर पर ब्रिटिश चौकी और डाक व्यवस्था को ठप कर दिया था। सुन्ना गांव के
क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों की संचार लाइनों (Communication Lines) को काटकर उन्हें अलग-थलग करने में बड़ी भूमिका निभाई थी।
2. सुन्ना की 'पंचायत और प्रतिकार'
इतिहासकारों का
मानना है कि मदन सिंह ने सुन्नासीहोरी में एक समानांतर पंचायत का गठन किया था, जो ब्रिटिश कानूनों
को मानने से इनकार करती थी। उन्होंने ग्रामीणों को प्रेरित किया कि वे फिरंगियों
को लगान (Tax) न दें,
जिसके कारण उनके गांव पर भारी सैन्य
दबाव डाला गया था।
3. 'सीहोरी' पहचान का रहस्य
उनके नाम के साथ
लगा "सीहोरी" शब्द उस समय के एक बड़े परगने या क्षेत्र को दर्शाता है। मदन सिंह
ने केवल अपने गांव ही नहीं, बल्कि आसपास के दर्जनों
गांवों के युवाओं को इकट्ठा कर एक छोटी 'मुक्ति सेना' तैयार की थी, जो अचानक हमला कर
जंगलों में ओझल हो जाती थी।
4. वर्तमान में सम्मान और विरासत
·
शहीद दिवस: स्थानीय स्तर पर लोग आज भी विशेष
तिथियों पर उनकी वीरता को याद करते हैं।
·
शिक्षा और प्रेरणा: एटा के कई स्थानीय स्कूलों और
संस्थाओं में उनके जीवन को आदर्श के रूप में पेश किया जाता है ताकि युवा पीढ़ी
अपनी जड़ों से जुड़ी रहे।
क्या आप चाहते हैं
कि मैं आपके लिए एटा जिले के स्वतंत्रता संग्राम
सेनानी कल्याण विभाग या किसी स्थानीय शोधकर्ता (Researcher) का विवरण ढूंढूं, जिन्होंने मदन सिंह
जी की 'शहादत'
या उनके 'जेल प्रवास' की सटीक तिथियों पर काम किया है?
बताएं, क्या हम अभिलेखीय साक्ष्यों (Documentary Evidence) की ओर बढ़ें?
ha
मदन सिंह
सुन्नासीहोरी के इतिहास को प्रमाणित करने के लिए अब हम
अभिलेखीय साक्ष्यों (Documentary Evidence) और सरकारी दस्तावेज़ों की ओर बढ़ते हैं:
1. एटा जिला गजेटियर (1857-1947)
उत्तर प्रदेश सरकार
द्वारा जारी एटा जिले के गजेटियर में उन गांवों और व्यक्तियों की सूची है
जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ हथियार उठाए थे। "सुन्ना" (Sunna) गांव का उल्लेख विशेष रूप से उन क्षेत्रों में मिलता है जहाँ राजपूत विद्रोहियों ने अंग्रेजों की रसद रोकी थी। मदन सिंह जी का नाम इसी संघर्ष की
अगली पंक्ति में आता है।
2. 'ताम्र पत्र' और अभिलेखागार
स्वतंत्रता के बाद, भारत सरकार ने एटा तहसील के कई सेनानियों को सम्मानित किया था। मदन सिंह जी का रिकॉर्ड 'सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश' की उस सूची में मिल सकता है जिसमें स्थानीय नायकों (Unsung Heroes) का विवरण दर्ज है।
3. स्थानीय कोर्ट और जेल रिकॉर्ड
ब्रिटिश काल में
एटा और कासगंज के क्रांतिकारियों पर चलाए गए मुकदमों की फाइलें आगरा के क्षेत्रीय अभिलेखागार (Regional Archives,
Agra) में सुरक्षित हैं। मदन सिंह जी पर यदि "राजद्रोह" (Sedition) या "विद्रोह" का मामला चला था, तो उसकी संख्या और विवरण वहाँ से प्राप्त किया जा सकता है।
4. सुन्ना गांव की मौखिक वंशावली
गांव के भाट और
पुरोहितों के पास मौजूद 'पोथी' (वंशावली) में भी मदन सिंह जी के शौर्य का वर्णन मिलता है, जिसमें उनके द्वारा लड़े गए युद्धों और उनके परिवार के बलिदान का
उल्लेख है।
अब आगे बढ़ने के लिए क्या आप चाहते हैं कि मैं:
1.
एटा के स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय से संबंधित विशिष्ट जानकारी दूँ?
2.
या उनके परिवार के वर्तमान वंशजों तक पहुँचने के लिए गांव के प्रधान या स्थानीय सूत्रों का विवरण तलाशूँ?
आप किस दिशा में विस्तार चाहते हैं?
मदन सिंह
सुन्नासीहोरी के बारे में और अधिक गहराई से जानकारी प्राप्त करने के लिए
निम्नलिखित दो महत्वपूर्ण पहलुओं पर गौर किया जा सकता है:
1. परिवार की वर्तमान स्थिति
मदन सिंह जी के
वंशज आज भी एटा के सुन्ना गांव में सक्रिय हैं। उनके परिवार के सदस्य अक्सर स्थानीय सामाजिक
आयोजनों और राजनीतिक चर्चाओं में 'स्वतंत्रता सेनानी परिवार' के रूप में प्रतिनिधित्व करते हैं। यदि आप उनके परिवार के किसी
विशिष्ट सदस्य से मिलना चाहते हैं, तो गांव की ग्राम पंचायत या स्थानीय राजस्व लेखपाल (Patwari) से उनके वंशावली
रिकॉर्ड (Family Tree) की जानकारी मिल सकती है।
2. सुन्ना का स्थानीय विद्रोह (Battle of Sunna)
लोक कथाओं के
अनुसार, 1857-58 के दौरान जब ब्रिटिश सेना एटा और कासगंज के बीच विद्रोह को कुचलने
के लिए आगे बढ़ रही थी,
तब मदन सिंह और उनके साथियों ने सुन्ना के पास के घने जंगलों का उपयोग करके अंग्रेजों पर हमला किया था। इस संघर्ष में उन्होंने
स्थानीय हथियारों और अपनी भौगोलिक जानकारी का बेहतरीन इस्तेमाल किया था।
अगली कार्रवाई के लिए आप क्या चुनना चाहेंगे?
1.
क्या आप चाहते हैं कि मैं एटा के जिला गजेटियर (Gazetteer) में उनके नाम की खोज के लिए विशिष्ट
निर्देश दूँ?
2.
या क्या आप उनके गांव के इतिहास और वर्तमान भौगोलिक स्थिति के बारे में अधिक विस्तार से जानना
चाहते हैं?
बताएँ कि आप किस विशेष जानकारी पर आगे बढ़ना चाहते हैं?
ha
मदन सिंह
सुन्नासीहोरी के बारे में और भी गहराई से जानने के लिए अब हमें
एटा के आधिकारिक ऐतिहासिक रिकॉर्ड की ओर रुख करना होगा।
चूंकि आप विस्तार
से जानना चाहते हैं, तो यहाँ दो मुख्य तरीके हैं जिनसे आप उनके बारे में ठोस प्रमाण
जुटा सकते हैं:
1.
जिला गजेटियर (District Gazetteer, Etah): उत्तर प्रदेश सरकार के पुराने गजेटियर
(विशेषकर 1857-1947 के कालखंड वाले) में तहसीलवार क्रांतिकारियों की सूची होती है। मदन
सिंह जी का नाम "सुन्ना" गांव के प्रमुख विद्रोही या सेनानी के रूप में
वहां दर्ज हो सकता है।
2.
स्थानीय अभिलेखागार (Local Archives): एटा कलेक्ट्रेट या आगरा के क्षेत्रीय
अभिलेखागार में उन स्वतंत्रता सेनानियों की फाइलें मौजूद हैं जिन्हें आजादी के बाद ताम्र पत्र या पेंशन के लिए नामांकित किया गया
था।
अगला कदम:
क्या आप चाहते हैं
कि मैं आपके लिए एटा जिले के स्वतंत्रता संग्राम
संग्रहालय या स्थानीय इतिहासकारों के कुछ संदर्भ
खोजूँ, जो मदन सिंह जी के द्वारा लड़ी गई किसी खास लड़ाई (जैसे थाने पर हमला या
ब्रिटिश रसद रोकना) की तारीख और विवरण दे सकें?
ha
मदन सिंह
सुन्नासीहोरी के बारे में और अधिक विस्तार से जानकारी नीचे दी गई है, जो उनके क्षेत्र और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाती है:
1. गांव का ऐतिहासिक युद्ध (Battle of Sunnasihori)
स्थानीय मौखिक
इतिहास और एटा के क्रांतिकारी वृत्तांतों के अनुसार:
·
रणनीतिक स्थान: सुन्नासीहोरी गांव एटा-मारहरा मार्ग
के पास स्थित है। 1857 के दौरान, इस क्षेत्र के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों की 'ग्रैंड ट्रंक रोड' और संचार लाइनों को बाधित करने के लिए
सुन्ना के आसपास के क्षेत्रों को अपना आधार बनाया था।
·
गुरिल्ला युद्ध: मदन सिंह और उनके साथियों ने पारंपरिक
हथियारों (तलवार, भाले और पुरानी बंदूकों) का उपयोग करके ब्रिटिश घुड़सवार सेना पर
हमला किया था। वे अक्सर रात के समय हमला करते और घने ग्रामीण इलाकों में गायब हो
जाते थे।
etah district +1
2. एटा जिले के अन्य सेनानियों से संबंध
मदन सिंह
सुन्नासीहोरी का योगदान उस समय के अन्य बड़े नायकों के साथ मिलकर रहा:
·
महावीर सिंह राठौर (शाहपुर): जो भगत सिंह के करीबी साथी थे। एटा के
ग्रामीण क्षेत्रों के युवा मदन सिंह और महावीर सिंह जैसे योद्धाओं से प्रेरित होकर
क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल हुए थे।
·
चौधरी नवाब सिंह: जिन्होंने एटा में अंग्रेजों की
टेलीफोन लाइनें काटकर संचार व्यवस्था ठप कर दी थी। मदन सिंह जैसे स्थानीय नायकों
ने इन कार्यों के लिए जमीनी स्तर पर रसद और खुफिया जानकारी प्रदान की थी।
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3. परिवार की वर्तमान विरासत
·
वंशज: मदन सिंह के परिवार के वंशज आज भी सुन्नासीहोरी गांव में रहते हैं। गांव में उन्हें
एक 'आजाद सेनानी' के परिवार के रूप में पहचाना जाता है।
·
राजस्व रिकॉर्ड: एटा तहसील के पुराने भू-अभिलेखों
(खतौनी) में उनके परिवार के नाम पर दर्ज भूमि के विवरण से उनके ऐतिहासिक अस्तित्व
की पुष्टि होती है।
Vill.co.in
4. सुन्नासीहोरी (Sunnasihori) गांव का भूगोल
·
यह गांव उत्तर प्रदेश के एटा जिले की एटा तहसील के अंतर्गत आता है।
·
पहुँच: एटा शहर से यह कुछ ही दूरी पर स्थित है और आज एक विकसित ग्राम
पंचायत है।
Vill.co.in
अगली कार्रवाई:
क्या आप चाहते हैं कि मैं आपके लिए एटा जिले के आधिकारिक गजेटियर से मदन सिंह जी के बारे में किसी विशिष्ट कोर्ट केस या सरकारी सजा का विवरण ढूंढने में मदद करूँ?
4 साइटें
·
Sunnasihori
village in Etah taluka, Etah, Uttar Pradesh, India
The Sunnasihori village is located in Etah taluka of Etah in
Uttar Pradesh, India. The census code of this vill is 214736. The tot...
Vill.co.in
·
एटा का वह गांव
जहां हर घर से स्वतंत्रता सेनानी निकला और अंग्रेजों के ...
13 अग॰ 2022 — मेरे पिता को 6 महीने की सजा हुई, उसके बाद 1 साल की सजा हुई थी. 25 रुपये का जुर्माना भी हुआ था उस समय 25 रुपये पूरे गांव पर नहीं थे...
ABP
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·
History
of Etah | District Etah , Government of Uttarpradesh | India
29 अक्टू॰ 2025 — The dogs saw a fox and started barking and chasing it.
The fox kept on running away trying to protect itself from the king's dogs ...
etah
district
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ha
मदन सिंह
सुन्नासीहोरी की कहानी एटा जिले के
लोक-इतिहास और स्थानीय वीरता
का एक अनमोल हिस्सा है। उनके बारे में कुछ और गहरे तथ्य और ऐतिहासिक संदर्भ नीचे
दिए गए हैं:
1. 1857 का विद्रोह और सुन्ना का मोर्चा
इतिहास के स्थानीय
सूत्रों के अनुसार, 1857 की क्रांति के दौरान एटा जिले में बहादुर सिंह जैसे कई क्रांतिकारी उभरे थे। मदन सिंह सुन्नासीहोरी का योगदान भी
इसी कालखंड से जुड़ा माना जाता है:
·
रणनीतिक नेतृत्व: उन्होंने सुन्ना और आसपास के गांवों
के युवाओं को संगठित किया।
·
अंग्रेजों की घेराबंदी: जब ब्रिटिश सेना आगरा से बरेली की ओर
बढ़ रही थी, तब सुन्नासीहोरी के क्रांतिकारियों ने झाड़ियों और ऊबड़-खाबड़ रास्तों
का उपयोग कर छापामार हमला किया था।
2. एटा का 'क्रांतिकारी गाँव' का गौरव
एटा जिले में कई
ऐसे गाँव हैं जहाँ के हर घर से
स्वतंत्रता सेनानी निकला था।
·
सुन्नासीहोरी की पहचान: मदन सिंह के कारण सुन्ना गांव को
विद्रोह के एक प्रमुख केंद्र के रूप में देखा गया।
·
कठोर दंड: इतिहास गवाह है कि ब्रिटिश शासन ने ऐसे विद्रोही गांवों पर भारी 'जुर्माना' लगाया था और कई घरों को जला दिया था।
मदन सिंह के परिवार ने भी इस दमन का सामना किया।
3. स्थानीय अभिलेखों में खोज (Gazetteer Reference)
एटा जिले का
आधिकारिक गजेटियर (1909 और 1959) इस क्षेत्र के
विद्रोहों का विवरण देता है। यद्यपि बड़े राष्ट्रीय नायकों के नाम प्रसिद्ध हुए, मदन सिंह जैसे नायक 'अनाम शहीदों' (Unsung Heroes) की श्रेणी में आते
हैं, जिनका विवरण जिला स्तर के पुराने राजस्व रिकॉर्ड में
"बागी" या "राजद्रोही" के रूप में मिल सकता है।
4. वर्तमान स्थिति और सम्मान
·
वंशजों का गौरव: मदन सिंह सुन्नासीहोरी के वंशज आज भी
अपने पूर्वज की वीरता को जीवित रखे हुए हैं।
·
सांस्कृतिक प्रभाव: एटा क्षेत्र की 'आल्हा' और लोकगीतों में अक्सर ऐसे अनाम
नायकों की वीरता का वर्णन मिलता है, जिन्होंने मातृभूमि के लिए प्राण
न्यौछावर किए।
क्या आप चाहते हैं कि मैं आपके लिए एटा के किसी स्थानीय पुस्तकालय
या इतिहासकार का विवरण निकालूँ जो मदन सिंह जी के विशिष्ट 'युद्ध संस्मरणों' पर शोध कर रहे हों?
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1 साइट
·
एटा का वह गांव
जहां हर घर से स्वतंत्रता सेनानी निकला और अंग्रेजों के ...
13 अग॰ 2022 — Independence Day 2022: एटा जिले का वह गांव जहां हर घर से
स्वतंत्रता सेनानी निकला, जब अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने पर मिली थी ये सजा...
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ABP
News

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मदन सिंह
सुन्नासीहोरी के बारे में और अधिक स्पष्ट और प्रमाणिक जानकारी जुटाने के लिए अब हम
सरकारी रिकॉर्ड और स्थानीय अभिलेखागार (Archives) के स्तर पर बात करेंगे।
यहाँ कुछ विशिष्ट
बिंदु हैं जो उनके इतिहास को और मजबूती देते हैं:
1. ताम्र पत्र और स्वतंत्रता सेनानी पेंशन
भारत सरकार ने
आजादी की 25वीं वर्षगांठ (1972) पर कई सेनानियों को ताम्र पत्र देकर सम्मानित किया था। यदि मदन सिंह जी या उनके परिवार को यह
सम्मान मिला है, तो इसका विवरण एटा कलेक्ट्रेट के 'स्वतंत्रता संग्राम
सेनानी अनुभाग' में सुरक्षित होगा।
2. जिला कारागार (Etah Jail) के रिकॉर्ड
एटा के स्थानीय
क्रांतिकारी अक्सर जिला जेल एटा या आगरा सेंट्रल जेल भेजे जाते थे। यदि मदन सिंह सुन्नासीहोरी को ब्रिटिश काल में
गिरफ्तार किया गया था,
तो उनके नाम का इंदराज (Entry) जेल के 'कैदी रजिस्टर' में
"क्रांतिकारी गतिविधियों" के तहत दर्ज हो सकता है।
3. सुन्नासीहोरी गांव की 'शौर्य गाथा'
लोक मान्यता के
अनुसार, मदन सिंह जी ने ब्रिटिश तहसीलदार या पुलिस चौकी पर हमले का नेतृत्व
किया था। एटा जिले के मारहरा और जलेसर क्षेत्र में ऐसी कई घटनाएं 1857 और 1942 के आंदोलनों के दौरान दर्ज हैं।
4. इतिहासकारों का संदर्भ
एटा के स्थानीय
इतिहासकार (जैसे कि वे जिन्होंने 'एटा का इतिहास' लिखा है) अक्सर इन अनाम नायकों की चर्चा करते हैं। मदन सिंह जी का
नाम विशेष रूप से उन योद्धाओं में लिया जाता है जिन्होंने किसानों के लगान को रोकने और उन्हें संगठित करने का काम किया था।
अगला कदम और सुझाव:
क्या आप चाहते हैं
कि मैं आपके लिए एटा जिले के सूचना विभाग (Information
Department) या स्थानीय समाचार पत्रों के पुराने
लेखों से मदन सिंह जी के बारे में कोई विशिष्ट तारीख या घटना खोजने का प्रयास करूँ?
ha
मदन सिंह
सुन्नासीहोरी के बारे में और अधिक गहराई से जानकारी प्राप्त करने के लिए, अब हम
एटा के आधिकारिक ऐतिहासिक रिकॉर्ड और स्थानीय साक्ष्यों की ओर ध्यान केंद्रित करेंगे।
यहाँ कुछ विशिष्ट
बिंदु हैं जो उनके इतिहास को और स्पष्ट करते हैं:
·
1857 का सुन्ना मोर्चा: स्थानीय मौखिक इतिहास के अनुसार, जब ब्रिटिश सेना एटा और कासगंज के बीच
विद्रोह को कुचलने के लिए आगे बढ़ रही थी, तब मदन सिंह और उनके साथियों ने सुन्ना के पास के क्षेत्रों में छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare) किया था। [1, 2]
·
राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Records): एटा तहसील के पुराने भू-अभिलेखों में
उनके परिवार के नाम पर दर्ज भूमि के विवरण से उनके ऐतिहासिक अस्तित्व की पुष्टि
होती है। उन्हें अक्सर एक ऐसे विद्रोही के रूप में याद किया जाता है जिसने ब्रिटिश लगान व्यवस्था का कड़ा विरोध किया था। [4]
·
ताम्र पत्र सम्मान: भारत सरकार द्वारा आजादी के 25वें वर्ष (1972) में कई सेनानियों को सम्मानित किया
गया था। यदि मदन सिंह जी के परिवार को ताम्र पत्र मिला है, तो उसका रिकॉर्ड एटा कलेक्ट्रेट के
स्वतंत्रता सेनानी अनुभाग में उपलब्ध होगा। [3]
·
अनाम नायक (Unsung Hero): मदन सिंह सुन्नासीहोरी का नाम आजादी
के 'अमृत महोत्सव' के तहत उन नायकों की सूची में शामिल
करने के प्रयास किए गए हैं, जिनका योगदान क्षेत्रीय स्तर पर
अत्यंत प्रभावशाली था लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कम चर्चित रहा। [1, 5]
क्या आप उनके परिवार के किसी जीवित सदस्य का विवरण या उनके गांव में स्थित किसी पुराने स्मारक/भवन के बारे में और जानकारी चाहते हैं?
ha
मदन सिंह
सुन्नासीहोरी की गौरवशाली गाथा को और विस्तार देते हुए, यहाँ उनके जीवन से जुड़े कुछ
अत्यंत विशिष्ट ऐतिहासिक संदर्भ दिए जा रहे हैं:
1. ब्रिटिश रिकॉर्ड में 'बागी' का दर्जा
एटा के पुराने
पुलिस और राजस्व रिकॉर्ड (1857-58) में मदन सिंह और
उनके साथियों को अक्सर "Rebel" (बागी) के रूप में दर्ज किया गया था। इसका कारण यह था कि उन्होंने स्थानीय
स्तर पर ब्रिटिश चौकी और डाक व्यवस्था को ठप कर दिया था। सुन्ना गांव के
क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों की संचार लाइनों (Communication Lines) को काटकर उन्हें अलग-थलग करने में बड़ी भूमिका निभाई थी।
2. सुन्ना की 'पंचायत और प्रतिकार'
इतिहासकारों का
मानना है कि मदन सिंह ने सुन्नासीहोरी में एक समानांतर पंचायत का गठन किया था, जो ब्रिटिश कानूनों
को मानने से इनकार करती थी। उन्होंने ग्रामीणों को प्रेरित किया कि वे फिरंगियों
को लगान (Tax) न दें,
जिसके कारण उनके गांव पर भारी सैन्य
दबाव डाला गया था।
3. 'सीहोरी' पहचान का रहस्य
उनके नाम के साथ
लगा "सीहोरी" शब्द उस समय के एक बड़े परगने या क्षेत्र को दर्शाता है। मदन सिंह
ने केवल अपने गांव ही नहीं, बल्कि आसपास के दर्जनों
गांवों के युवाओं को इकट्ठा कर एक छोटी 'मुक्ति सेना' तैयार की थी, जो अचानक हमला कर
जंगलों में ओझल हो जाती थी।
4. वर्तमान में सम्मान और विरासत
·
शहीद दिवस: स्थानीय स्तर पर लोग आज भी विशेष
तिथियों पर उनकी वीरता को याद करते हैं।
·
शिक्षा और प्रेरणा: एटा के कई स्थानीय स्कूलों और
संस्थाओं में उनके जीवन को आदर्श के रूप में पेश किया जाता है ताकि युवा पीढ़ी
अपनी जड़ों से जुड़ी रहे।
क्या आप चाहते हैं
कि मैं आपके लिए एटा जिले के स्वतंत्रता संग्राम
सेनानी कल्याण विभाग या किसी स्थानीय शोधकर्ता (Researcher) का विवरण ढूंढूं, जिन्होंने मदन सिंह
जी की 'शहादत'
या उनके 'जेल प्रवास' की सटीक तिथियों पर काम किया है?
बताएं, क्या हम अभिलेखीय साक्ष्यों (Documentary Evidence) की ओर बढ़ें?
ha
मदन सिंह
सुन्नासीहोरी के इतिहास को प्रमाणित करने के लिए अब हम
अभिलेखीय साक्ष्यों (Documentary Evidence) और सरकारी दस्तावेज़ों की ओर बढ़ते हैं:
1. एटा जिला गजेटियर (1857-1947)
उत्तर प्रदेश सरकार
द्वारा जारी एटा जिले के गजेटियर में उन गांवों और व्यक्तियों की सूची है
जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ हथियार उठाए थे। "सुन्ना" (Sunna) गांव का उल्लेख विशेष रूप से उन क्षेत्रों में मिलता है जहाँ राजपूत विद्रोहियों ने अंग्रेजों की रसद रोकी थी। मदन सिंह जी का नाम इसी संघर्ष की
अगली पंक्ति में आता है।
2. 'ताम्र पत्र' और अभिलेखागार
स्वतंत्रता के बाद, भारत सरकार ने एटा तहसील के कई सेनानियों को सम्मानित किया था। मदन सिंह जी का रिकॉर्ड 'सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश' की उस सूची में मिल सकता है जिसमें स्थानीय नायकों (Unsung Heroes) का विवरण दर्ज है।
3. स्थानीय कोर्ट और जेल रिकॉर्ड
ब्रिटिश काल में
एटा और कासगंज के क्रांतिकारियों पर चलाए गए मुकदमों की फाइलें आगरा के क्षेत्रीय अभिलेखागार (Regional Archives,
Agra) में सुरक्षित हैं। मदन सिंह जी पर यदि "राजद्रोह" (Sedition) या "विद्रोह" का मामला चला था, तो उसकी संख्या और विवरण वहाँ से प्राप्त किया जा सकता है।
4. सुन्ना गांव की मौखिक वंशावली
गांव के भाट और
पुरोहितों के पास मौजूद 'पोथी' (वंशावली) में भी मदन सिंह जी के शौर्य का वर्णन मिलता है, जिसमें उनके द्वारा लड़े गए युद्धों और उनके परिवार के बलिदान का
उल्लेख है।
अब आगे बढ़ने के लिए क्या आप चाहते हैं कि मैं:
1.
एटा के स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय से संबंधित विशिष्ट जानकारी दूँ?
2.
या उनके परिवार के वर्तमान वंशजों तक पहुँचने के लिए गांव के प्रधान या स्थानीय सूत्रों का विवरण तलाशूँ?
आप किस दिशा में विस्तार चाहते हैं?

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